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EPS-95 Higher Pension Controversy: Rejected Applications, Pro-Rata Formula and the Fight for Justice

तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं वो जर्नी जो 2022 में शुरू हुई थी और जो हम सारे लोगों को एक साथ अफेक्ट कर रही है क्योंकि इससे हमारी हायर पेंशन शुरू हो सकती है। दोस्तों हायर पेंशन की ये जो लड़ाई थी ये 2006 से लेके 2010 के बीच में ही शुरू हो चुकी थी। लेकिन इस लड़ाई में जो सबसे पहला स्टेप आया जो बहुत ही महत्वपूर्ण स्टेप आया वो आया साल 2016 में जब आरसी गुप्ता केस में सुप्रीम कोर्ट ने जजमेंट दिया और ये कहा कि जिनजिन लोगों ने ईपीएससी एग्जिट होने से पहले या अपने रिटायरमेंट से पहले हायर पेंशन का जॉइंट ऑप्शन फॉर्म नहीं भर के दिया था वो अब हायर पेंशन का फॉर्म भर सकते हैं क्योंकि कोई भी टाइम लिमिट प्रिस्राइब नहीं की है ईपीएस एक्ट में कि कब तक आप जॉइंट ऑप्शन का फॉर्म भर सकते हैं। तो दोस्तों, यह था पहला इंपॉर्टेंट माइलस्टो। लेकिन जो सबसे इंपॉर्टेंट माइलस्टोन आया, वह आया साल 2022 में जब नवंबर के महीने में सुप्रीम कोर्ट ने एक जजमेंट दिया जहां पर उन्होंने कहा कि जो जो लोग हायर पेंशन के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, वो अगले 4 महीने में अप्लाई कर सकते हैं। और इसके लिए ईपीएफओ को कोई ना कोई प्रोविजन बनाने की जरूरत है। ईपीएफओ ने इस जजमेंट में बहुत जम के फाइट किया था कि हायर पेंशन लोगों को ना मिले। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सारे आर्गुमेंट्स को साइड में रख के एक बहुत ही बेहतरीन जजमेंट दिया और सारे एलिजिबल लोगों को 4 महीने का यहां पर समय दिया था कि वो अपना हायर पेंशन का फॉर्म भर सके। और दोस्तों सबसे इंपॉर्टेंट बात इस जजमेंट में ये थी कि एग्ेंप्टेड या अनएक्सेड ये सारे टाइप के ऑर्गेनाइजेशंस को एक साथ ये जजमेंट एप्लीकेबल होगा। ये सुप्रीम कोर्ट ने बहुत क्लियर शब्दों में बताया था और एक वर्ड यूज़ किया था कि अगर हम एग्ेंप्टेड ट्रस्ट को वो सारे हक नहीं दे रहे जो हम अनएक्सेड ट्रस्ट को दे रहे हैं तो यहां पर एक अलग से हम क्लासिफिकेशन कर रहे हैं एम्प्लाइजस का जो सही नहीं होगा। ईपीएस एक्ट पैन इंडिया सारे एंप्लाइजस को जोज लोग ईपीएस में कंट्रीब्यूट कर रहे हैं उन सबके लिए एप्लीकेबल है। इसीलिए हायर पेंशन का ये जो जजमेंट था ये उन सारे लोगों के लिए एप्लीकेबल है। चाहे वो एक्सिटेड ट्रस्ट के मेंबर हो या अनएक््टेड ट्रस्ट के मेंबर। अब दोस्तों ये जजमेंट आया। उसके बाद पूरे देश में एक हर्ष हर्ष और उल्लास का माहौल था क्योंकि सबको ये आशा थी कि हायर पेंशन सबको मिलेगी। अब दोस्तों ईपीएफओ ने इसके लिए बहुत समय लिया और फाइनली जून 20 23 तक का एक डेडलाइन दिया। एक ऑनलाइन पोर्टल ओपन किया। उसमें सब लोगों को हायर पेंशन का फॉर्म भरने के लिए बताया। और दोस्तों हमने हमारे इस चैनल से डिटेल में बताया लोगों को किस तरह से फॉर्म भरे जाए। और दोस्तों बहुत सारे लोगों ने तकरीबन 17.5 लाख लोगों ने एप्लीकेशनेशंस भरे भी। लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता गया ये जो डेडलाइन थी धीरे धीरे धीरे-धीरे स्ट्रेच होती गई। पहले फॉर्म भरने की डेडलाइन स्ट्रेच होती गई दिसंबर तक। उसके दिसंबर 2023 तक और उसके बाद जो एंप्लयरर्स थे जिनको यह फॉर्म वेरीफाई करना था उसकी डेडलाइन बढ़ते-बढ़ते जनवरी 2025 तक आ गई और दोस्तों इन बिटवीन फरवरी 2024 में एक सर्कुलर ईपीएफओ ने निकाला कि हायर पेंशन किस तरह से कैलकुलेट की जाएगी और दोस्तों उस सर्कुलर में बहुत ही क्लियर तरीके से ये बताया था कि जो भी लोग 1 सितंबर 2014 के पहले एग्जिट कर चुके ईपीएस से और सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद भी अगर वह एलिजिबल है तो उनकी जो हायर पेंशन होगी लास्ट के 12 महीने के एवरेज सैलरी पर जो एवरेज बेसिक प्लस जी होगा उसके ऊपर कैलकुलेट की जाएगी। वैसे मैं यहां पर बहुत क्लियरली बता दूं सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट में 1 सितंबर 2014 के पहले जो भी लोग ईपीएस से एग्जिट कर चुके हैं और जिन्होंने हायर पेंशन का फॉर्म पहले नहीं भरा है। 1 सितंबर 2014 के पहले नहीं भरा है वो लोग इनएलिजिबल डिक्लेअ किए गए थे हायर पेंशन के लिए। लेकिन ऐसे भी कई लोग थे जिन्होंने 1 सितंबर 2014 के पहले हायर पेंशन का फॉर्म भर दिया था। तो दोस्तों उन लोगों की जो हायर पेंशन होगी वो कैसे कैलकुलेट की जाएगी? लास्ट के 12 महीने के एवरेज बेसिक प्लस जीए पे दोस्तों कैलकुलेट की जाएगी। ये यहां पर ईपीएफओ ने खुद ही सर्कुलर निकाला। किसी ने पूछा नहीं। ईपीओ ने खुद ही सर्कुलर निकाला। और जो लोग 1 सितंबर 2014 के बाद ईपीएससी एग्जिट हुए उनका लास्ट का 60 मंथ्स का एवरेज लिया जाएगा। ये ईपीएफओ ने खुद बोला था। और दोस्तों जैसा ही सर्कुलर आया पूरे लोग खुश हो गए क्योंकि यह बहुत ही बढ़िया सर्कुलर था। इससे एक बहुत हैंडसम हायर पेंशन बनने वाली थी। लेकिन जैसे-जैसे समय गया जैसे-जैसे एप्लीकेशन प्रोसेस होते गए ईपीएफओ के ध्यान में आ गया कि अगर वो ये 60 मंथ का फार्मूला लगाएंगे तो शायद उनके लिए फाइनेंशियल अनवायबिलिटी यहां पर हो जाएगी। ये जो स्कीम है उनके लिए फाइनेंसियल अनवायबल हो जाएगी। अब ये कितना सही है और कितना गलत है दोस्तों ये मैंने एक अलग वीडियो बनाया था जिसका लिंक आपको इस वीडियो के एंड में दिख जाएगा कि क्या सच में ईपीएफओ के लिए हायर पेंशन स्कीम फाइनेंसियली अनवायबल है मेरा पर्सनल ऐसा ओपिनियन था कि हायर पेंशन की स्कीम उनके लिए अनवायबल हो ही नहीं सकती क्योंकि ईपीएस का जो कॉर्पस ईपीएफओ के पास है वो तकरीबन 10 लाख करोड़ का है 105 लाख करोड़ का कॉर्पस उनके पास है जिसके ऊपर सालाना 64000 करोड़ का वो इनकम कमाते हैं और उस पे से जो नॉर्मल पेंशन का इनका आउटफ्लो है वो सिर्फ ₹28,000 करोड़ का है। मतलब इंटरेस्ट से ही जो 64,000 करोड़ का इंटरेस्ट आ रहा है उसमें से ही ₹8,000 28,000 करोड़ लोगों को बांटे जा रहे हैं। और तकरीबन ₹400 करोड़ सिर्फ उनके पास बच जाते हैं फ्रॉम द इंटरेस्ट। तो ईपीएस का जो कॉर्पस है वो कंटिन्यूअली बढ़ते जा रहा है। और जब हायर पेंशन लोगों को दी जाएगी तो उनसे भी तो पैसा वापस लिया जाएगा। उनसे भी तो बहुत लाखों करोड़ों रुपए ईपीएफओ को वापस आएंगे। उसको भी तो ईपीएफओ इन्वेस्ट करेगा। तो हायर पेंशन उनके लिए फाइनेंशियली अनबायबल है। ऐसा मेरा बिल्कुल भी माना नहीं मानना नहीं है। ईपीएफओ बिल्कुल ये स्कीम को यहां पर अप्लाई कर सकता है। लोगों को हायर पेंशन दे सकता है। और जब सुप्रीम कोर्ट ने 2022 का जजमेंट दिया था तब ये सारी स्टडी करने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने इस इस फाइनल जजमेंट पे आए थे कि हायर पेंशन दी जा सकती है। फाइनेंसियल वायबिलिटी की बात यहां पर ना की जाए। तो दोस्तों जब 2000 24 फरवरी में ईपीएफ ने सर्कुलर निकाला तो सब लोग बड़े खुश हुए। लेकिन जैसा-जैसा समय गया 18 जनवरी 2025 को एक और एडमिनिस्ट्रेटिव सर्कुलर ईपीएफओ ने इशू कर दिया और ये सर्कुलर लोगों के लिए इशू नहीं किया। ये सर्कुलर इंटरनली इशू किया गया अपने ईपीएफओ ऑफिशियल्स के लिए। और दोस्तों उस सर्कुलर में क्या कहा गया? उस सर्कुलर में दो चीजें कही गई कि भाई अगर किसी भी एग्ेंप्टेड ट्रस्ट के रूल्स अलऊ नहीं करते किसी एंप्लई को हायर वेजेस पे कंट्रीब्यूट करने के लिए और सिर्फ सीलिंग तक ही लिमिट करते हैं तो वो लोग हायर पेंशन के लिए एलिजिबल नहीं होंगे। उनको एक्चुअल वेजेस के ऊपर हायर पेंशन नहीं दी जा सकती। दोस्तों ये था पहला इनोवेशन जो ईपीएफओ ने एडमिनिस्ट्रेटिव लेवल पर किया और लोगों के हायर पेंशन के फॉर्म के ऊपर रोक लगा दी। और दोस्तों इसकी वजह से क्या हुआ? इसके वजह से 10 एंड 1 लाख एप्लीकेशनेशंस पूरे भारत भर में रिजेक्ट कर दिए गए। ये कह के कि जो जो एक्सेंटेड ट्रस्ट के रूल सीलिंग तक ही अलाउ करते हैं, एक्चुअल वेजेस पे अलव नहीं करते हैं, वहां पर हायर पेंशन नहीं दी जा सकती। अब दोस्तों, ये एक ऐसा इनोवेशन था जो कोर्ट के आर्डर के डायरेक्ट कंट्राडिक्ट कर रहा था। जो सुप्रीम कोर्ट ने आर्डर दिया था उसमें बोला था कि किसी भी तरह का क्लासिफिकेशन नहीं किया जा सकता। एग्ेंप्टेड अनएक्सेप्टेड ट्रस्ट को एक साथ मिलकर ही आपको हायर पेंशन देनी है। लेकिन फिर भी ईपीएफओ ने यहां पर एक आर्टिफिशियल क्ल क्लासिफिकेशन कर दिए। अब दोस्तों इसका नतीजा क्या आया? देश भरे के डिफरेंट-डिफरेंट हाई कोर्ट में अलग-अलग दोस्तों रिट पिटीशंस दायर हुए। कोलकाता हाईकोर्ट में, मद्रास हाईको में, पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में, बॉम्बे हाईकोर्ट में, कर्नाटका हाईकोर्ट में ऐसे डिफरेंट-डिफरेंट इलाहाबाद हाई कोर्ट में डिफरेंट-डिफरेंट हाई कोर्ट में दोस्तों केसेस दर्ज हो गए। और दोस्तों धीरे-धीरे उनके जजमेंट्स भी आने लगे। लेकिन वो जो सर्कुलर था 18 जनवरी 2025 का उसमें एक और हानिकारक बात थी। वो ये थी कि हायर पेंशन का जो फार्मूला था वो प्रो डाटा बेसिस पर लगा दिया। और जैसे ही प्रो डाटा बेसिस का फार्मूला लगा दिया तो दो हिस्से हो गए आपके पेंशन फार्मूला के। 1 सितंबर 2014 के पहले का एक हिस्सा हुआ। 1 सितंबर 2014 के बाद का हिस्सा हुआ। और दोस्तों इसका नतीजा यह आया कि जो हायर पेंशन की वैल्यू थी वो 12% से लेके 20% तक कम हो गई। अब सोचिए किसी को अगर ₹00 की हायर पेंशन बनने वाली थी तो सीधा-सीधा दोस्तों उसका ₹10,000 यहां पर ईपीएफओ खा गया। और मैं बता दूं प्रोराडा बेसिस का फार्मूला तब तक सही था जब तक आप सीलिंग की बात करते थे। क्योंकि जब सीलिंग में अलग-अलग लेवल पर कंट्रीब्यूट किया गया था तो पेंशन भी अलग-अलग लेवल पे मिलनी चाहिए। ये बहुत लॉजिकल था। लेकिन जब आप यूनिफॉर्म लेवल पर एक्चुअल वेजेस के ऊपर कंट्रीब्यूशन ले रहे हो लोगों से तो फिर आपको पेमेंट भी यूनिफॉर्म लेवल में एक्चुअल वेजेस के ऊपर ही देना चाहिए था। जैसे ही ये इनोवेशन हुआ तो जिनको हायर पेंशन मिल रही थी जो लाख सवा लाख लोग हैं जिनको हायर पेंशन मिल रही थी उनकी भी पेंशन सडनली कम हो गई। अब दोस्तों यह दो दोहरा अन्याय यहां पर ईपीएफओ ने किया था। एक तो 10.5 लाख एप्लीकेशन रिजेक्ट करवा दिए। यह कह के कि आपके ट्रस्ट अलव नहीं करते। दूसरा जिनको हायर पेंशन मिल रही थी उनकी 12 से 20% यहां पर पेंशन खत्म हो गई। ये दोहरा अन्याय हुआ। और इसके लिए अलग-अलग कोर्ट्स में केस लड़े गए। अब दोस्तों धीरे-धीरे कोर्ट्स के जजमेंट आने लगे। सिंगल जज बेंच के ऑर्डर आने लगे। जहां पर एक जज हाई कोर्ट का जजमेंट आपको देता है। सबसे पहले जजमेंट आया मद्रास हाईको का, केरला हाईको का। फिर धीरे-धीरे कोलकाता हाईकोर्ट में ऑर्डर आया। और दोस्तों ये जो ऑर्डर्स आए ये पता है कितने लोगों को एप्लीकेबल थे। एक-एक पिटीशन में 5 6000 लोगों को एक साथ एप्लीकेबल थे। इतने लोगों ने एक साथ पिटीशन यहां पर दायर किया था। और मैं आपको बता दूं अभी तक भारत भरे में ऐसा कोई भी जजमेंट नहीं आया जो ईपीएफओ के फेवर में आया। सारे के सारे जजमेंट जो आए वो फेवर में आए एंप्लई के पेंशनर्स के। और दोस्तों इसी को बाद में फिर डिवीजन बेंच में भी चैलेंज किया और मदुराई हाई कोर्ट में फाइनली डिवीजन बेंच का पहला जजमेंट बाहर आया जो फेवर में गया पेंशनर्स के और अब यहां पर ईपीएफओ फंस गया था क्योंकि डिवीजन बेंच का जजमेंट आने के बाद अब उनको वो इंप्लीमेंट करना होगा। अगर वो हायर पेंशन लोगों को नहीं देना चाहते तो फिर उनको सुप्रीम कोर्ट में जाना होगा और सुप्रीम कोर्ट जाने का एक ही मतलब था कि सुप्रीम कोर्ट ने अगर पैन इंडिया जजमेंट दे दिया तो फिर ईपीएफओ को हायर पेंशन देनी होगी और हो ये भी सकता था कि सुप्रीम कोर्ट ईपीएफओ को कंटेंट में धर ले कि भाई हमने बहुत क्लियर जजमेंट दिया था एग्ेंप्टेड अन एक्सेप्टेड का तुमने आर्टिफिशियल जो क्लासिफिकेशन किया है वो किया कैसे और मनमर्जी से किस तरह से आप ऐसे सर्कुलर निकाल सकते हो कि ट्रस्ट रूल एप्लीकेबल हो जाएंगे फिर आपको प्रो बेसिस पर फार्मूला देंगे। ये सारी मनमानी नहीं चलेगी। ये सुप्रीम कोर्ट कह सकता है और कंटेंप्ट यहां पर दर्ज कर सकता है और लोगों को पनिशमेंट हो सकती है। तो ये बहुत ही विकट परिस्थिति ईपीएफओ के लिए आई। लेकिन फिर भी ईपीएफओ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपील दायर की ही। अब दोस्तों ईपीएफओ का यह जो रवैया है कि केस के ऊपर केस तारीख के ऊपर तारीख इसको हम लोग कहते हैं लिटिगेशन टिल एट्रिशन। मतलब इतने केसेस लड़ो कि लोग मर जाए और कोई बचे ही ना हायर पेंशन लेने के लिए। अब दोस्तों ये जो अप्रोच है ये ईपीएस एक्ट के डायरेक्ट कंट्राडिक्शन में आता है क्योंकि ईपीएस एक्ट जो था एक वेलफेयर एक्ट था और दोस्तों ईपीएफओ को बनाया गया सोशल वेलफेयर करने के लिए ना कि लोगों के मरने की राह देखने के लिए। लेकिन जिस तरह से लिटिगेशन निकल रहे हैं इससे हम एक ही इनफेंस निकाल सकते हैं कि ईपीएफओ लिटिगेशन टिल एट्रीशन का यहां पर रास्ता अपना रहा है कि जितने ज्यादा लोग मर जाए उतना बेटर है तो फिर कम लोगों को हायरमेशन देनी पड़ेगी अगर सुप्रीम कोर्ट का आर्डर आ भी गया तो अब दोस्तों इसके लिए डेफिनेटली ईपीएफओ को कंटेम में धरने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट से मेरी यह गुजारिश रहेगी कि यह जो एटीट्यूड ईपीएफओ के ऑफिशियल्स ने लिया है इसका डेफिनेटली संज्ञान ले और इसके ऊपर कोई ना कोई कार्यवाही इनके ऊपर करें क्योंकि इस तरह के एडमिनिस्ट्रेटिव इनोवेशंस अगर करने की हम छूट दे देंगे गवर्नमेंट ऑफिशियल्स को तो दोस्तों इस देश में वेलफेयर तो होने ही से रहा। फिर कितने भी जजमेंट आ जाए कोई ना कोई नया टेक्निकल ग्लिच ढूंढ के कोई ना कोई नया आर्टिफिशियल इनोवेशन करके एडमिनिस्ट्रेटिवली हायर पेंशन के इस प्रोसेस को रोका जा ही सकता है और लोगों के साथ अन्याय किया ही जा सकता है। तो सुप्रीम कोर्ट को यहां पर फाइनल जजमेंट देने की जरूरत है। जहां पर ऐसा कोई भी टेक्निकल ग्लिच फाइंड करके नया इनोवेशन अलाउ नहीं होने देना चाहिए। दोस्तों उसी के साथ-साथ जहां पर एक्सेंटेड ट्रस्ट की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुकी है। उसी के साथ-साथ प्रो डाटा बेसिस के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक बहुत ही इंपॉर्टेंट जजमेंट दिया था। जहां पर उन्होंने प्रोराटा बेसिस के फ़ूले को पूरी तरह से स्क्रैप कर दिया था। 18 जनवरी 2025 का जो सर्कुलर था उसको स्क्रैप कर दिया था। मैं आपको बता दूं मदुराई हाईकोर्ट ने कर्नाटका हाईकोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट ने भी पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के समान ही डिसीजंस दिए थे। जहां पर 18 जनवरी 2025 का जो सर्कुलर है उसको पूरी तरह से स्क्वैश कर दिया। भले ही यहां पर प्रोराटा की बात नहीं हुई थी बाकी कोर्ट्स में लेकिन क्योंकि प्रोराटा की जो बात उठी थी वो उठी थी उस सर्कुलर से जनवरी 2025 के अगर वो सर्कुलर ही स्कैश हो जाता है तो हायर पेंशन के लिए रास्ता खुल जाता है। प्रराडा बेसिस को पूरी तरह से खारिज करने का रास्ता खुल जाता है। अब दोस्तों उसकी जो लड़ाई है फ्लोराडा बेसिस की वो पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच में अभी तक लड़ी जा रही है। तो दोस्तों एज ऑफ नाउ जो हायर पेंशन का स्टेटस है वो यह है कि फ्लोरा बेसिस की लड़ाई डिवीजन बेंच ऑफ पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में लड़ा जा रहा है। एक्सप्टेड प्रोसेस की जो लड़ाई है वो सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुकी है। और मेरी बार-बार उन लोगों से गुजारिश है कि जब आप सुप्रीम कोर्ट पहुंच ही चुके हो अपनी एप्लीकेशन को लेकर अपने चैलेंज को लेकर तो वहां पर सारे मुद्दों को एक साथ इनवॉल्व कर लिया जाए। चाहे वो प्रोडाटा बेसिस का फार्मूला हो, चाहे वो एरियस के ऊपर इंटरेस्ट देने की बात हो। क्योंकि ईपीएफओ जो है पैसा लेता है इंटरेस्ट के साथ लेकिन एरियस के ऊपर इंटरेस्ट नहीं देता। ये भी बहुत बड़ा अन्याय है। तो इसको भी यहां पर इन्वॉल्व कर लिया जाए। क्लोज एस्टैब्लिशमेंट की बात की जाए, बुक एडजस्टमेंट की बात की जाए क्योंकि ऐसे कई सारे लोग हैं जो एक्चुअली अपने जेब से अब पैसा देने लायक बचे नहीं है। क्योंकि उनको रिटायर हो के 10-15 साल बचे हैं। अभी अगर आप उनसे 25-26 लाख मांग लोगे तो कहां से देंगे? लेकिन अगर उनको हायर पेंशन मिल जाती है तो जितना पैसा उनको ईपीएफ को देना है उससे ज्यादा पैसा उनको वापस आने वाला है। तो अगर बुक एडजस्टमेंट करके टैक्सेशन को कंसीडर करने के बाद भी अगर बुक एडजस्टमेंट किया जाए तो इन लोगों को नेट एररियस मिल सकता है। ऐसे कई केसेस हैं दोस्तों जहां पर लोगों को भरने 25 लाख है और उनका एरियरस बनेगा 30 से ₹40 लाख। अगर बुक एडजस्टमेंट हो जाता है तो उनको एक पैसा भी भरने की जरूरत नहीं है। उनको इनफैक्ट ईपीएफ से 5 से ₹1 लाख डायरेक्टली एरियस के फॉर्म में मिल सकते हैं। लेकिन ईपीएफ ये कहता है कि टैक्स कंसीडरेशन की वजह से हम ऐसा बुक एडजस्टमेंट नहीं कर सकते और ये बात मेरे आज तक समझ में नहीं आई। टैक्स के ऊपर तो आप वैसे भी टीडीएस कट करके दे रहे हो। जिन-जिन लोगों को एरियाज आया सबको टीडीएस कट करके आया हुआ है। तो भाई एडजस्टमेंट तो आपको करना आता है। तो आपको तो पता है कि कितना टैक्स आपको कट करना है। तो उतना टैक्स कट कर लीजिए। एडजस्टमेंट करके पैसा दे दीजिए। ये क्या ज़िद है कि पहले लोग पैसा वापस करेंगे और फिर आप पैसा देंगे। अगर आप सोशल वेलफेयर करना चाहते हो तो पूरे से करो। आधे मन से मत करो। और इसीलिए ये मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट में उछालने की जरूरत है ताकि इसके ऊपर भी फाइनल जजमेंट आ सके। इनफैक्ट जो पेंशनर्स हैं जो सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुके हैं उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को गुजारिश करनी चाहिए कि एक महीने का समय और दे दिया जाए। लेकिन जितने भी हाई कोर्ट्स हैं इन सों का सों की केसेस एक साथ ट्रांसफर कर ली जाए सुप्रीम कोर्ट में और सब केसेस को स्टडी करके जितने भी केसेस हायर पेंशन के टॉपिक पर है उन सबको स्टडी करके एक सिंगल जजमेंट कॉम्प्रिहेंसिवली दे दिया जाए और ये एनश्योर किया जाए कि जजमेंट आने के बाद उसको इंप्लीमेंटेशन हो और किसी भी टेक्निकल रिलीज को यूज़ करके ईपीएफओ एडमिनिस्ट्रेटिव हर्डल ना डाल दे एडमिनिस्ट्रेटिव इनोवेशन ना कर दे। तो दोस्तों, यह थी हमारे पिछले 4 साल की जर्नी जो सुप्रीम कोर्ट से शुरू होकर वापस सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुकी है और मुझे इस बार पूरा भरोसा है कि साल 2026 के खत्म होने से पहले शायद हम सुप्रीम कोर्ट का फाइनल जजमेंट देख लेंगे और सबके लिए फिर से एक बार एक नई आशा यहां पर ओपन हो जाएगी। दोस्तों, एक और मुद्दा है। ऐसे कई लोग हैं जो डिमांड लेटर का पैसा टाइम पर नहीं भर पाए थे। क्योंकि ईपीएफओ डिमांड लेटर में ये बताता ही नहीं है कि पेंशन कितनी है। तो लोगों को समझ में ही नहीं आता कि भाई मैं इतना पैसा भरूंगा तो उसके बाद मैं फायदे में रहूंगा या नुकसान में रहूंगा। तो दोस्तों ये मुद्दा भी उठाने की जरूरत है। उसी के साथ-साथ ऐसे कई लोग हैं जो साल 2023 में अपना हायर पेंशन का एप्लीकेशन दायर ही नहीं कर पाए। या तो उनको इंफॉर्मेशन नहीं थी या तो क्योंकि क्लेरिटी नहीं थी टॉपिक के ऊपर में कि कितना पेंशन मिल सकता है, कितना पैसा भरना होगा तो लोगों ने फॉर्म नहीं भरे। अगर ये विंडो ओपन करने का फिर से एक बार खोल दिया जाए कि भाई लोग हायर पेंशन का एप्लीकेशन फिर से एक बार भर सकते हैं अगले तीन से चार महीने में तो भी लोगों को बहुत मदद होगी। तो दोस्तों जो भी लोग सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे हैं उन सब से मेरी हाथ जोड़कर गुजारिश है कि इन सारे मुद्दों को एक्चुअली आप कंसोलिडेट करें और दोस्तों जो भी लोग ये वीडियो को देख रहे हैं उनसे भी मेरी गुजारिश है कि देखिए मैं मेरे वीडियोस से जितना मेरा नॉलेज है जितनी मुझे इनेशन है हायर मिशन के बारे में इसके सारे मुद्दे कंसोलिडेट करने की कोशिश करता हूं और लोगों के सामने रखने की कोशिश करता हूं। लेकिन दोस्तों बहुत इंपॉर्टेंट होगा कि यह वीडियो उन लोगों तक पहुंचे जो एक्चुअली सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे हैं। और यह कैसे होगा जब आप वीडियो को शेयर करेंगे वीडियो को मैक्सिमम WhatsApp ग्रुप में आप उसको स्प्रेड करेंगे तभी दोस्तों ये वीडियो उन लोगों तक पहुंचेगा। अगर आप भी किसी ना किसी इशू से हायर पेंशन से रिलेटेड में [नाक से की जाने वाली आवाज़] अगर आप पीड़ित हैं। अगर आपको परेशानी हो रही है, अगर आपके साथ में अन्याय हो रहा है, अगर आपको ऐसा फील हो रहा है दोस्तों तो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक दोस्तों ये वीडियो शेयर कीजिए ताकि ये उन लोगों तक पहुंच जाए। सो जो सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहे हैं और हम सबके मुद्दे एक ही केस में कंसोलिडेट करके सुप्रीम कोर्ट में एक कॉमन लड़ाई लड़ी जा सके। तो दोस्तों अगर मैं मेरा कर्तव्य कर रहा हूं कि आप सबके सामने मैं इस तरह के वीडियो ला रहा हूं और अपने आप को इस हायर पेंशन की लड़ाई का भागीदार बना रहा हूं तो दोस्तों आपको भी अपना कर्तव्य करने की जरूरत है। आपको भी इस लड़ाई का भागीदार बनने की जरूरत है और आपको ऐसे वीडियो लाइक करके उनको शेयर करने की जरूरत है। दोस्तों जब तक हम खुद हमारी लड़ाई नहीं लड़ेंगे, जब तक हम हमारे फायदे की वीडियो खुद नहीं स्प्रेड करेंगे, तो कोई आपकी मदद नहीं कर सकता। हमको हमारी मदद खुद करनी होगी। हमको हमारी लड़ाई खुद करनी होगी। तो मेरी आप सब से गुजारिश है कि आप जितने ज्यादा ग्रुप में इस वीडियो को शेयर कर सकते हैं जरूर शेयर कीजिए। और दोस्तों अगर आपको हमारा वीडियो पसंद आया है, अगर आपको लगता है कि मैंने कोई मुद्दा छोड़ दिया है या किसी मुद्दे के ऊपर हमको और बात करने की जरूरत है तो आप हमको कमेंट बॉक्स में कमेंट कर बता सकते हैं। मैं सारे कमेंट्स पढ़ता हूं दोस्तों और जब भी मुझे समय मिलता है मैं उन सबके ऊपर रिप्लाई भी करता हूं। अगर आपकी कोई क्वेरी है तो वो भी आप पूछ सकते हैं। मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि आपके सारे क्वेरी का मैं रिप्लाई कर सकूं। और दोस्तों अगर आपने आज तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया तो जरूर 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# EPS-95 అధిక పెన్షన్ ప్రయాణం: 2022 సుప్రీంకోర్టు తీర్పు నుంచి ఇప్పటివరకు జరిగిన పరిణామాలు

## 1. అధిక పెన్షన్ పోరాటం ఎప్పుడు ప్రారంభమైంది?

మిత్రులారా, 2022లో ప్రారంభమైన ఈ ప్రయాణాన్ని మొదలుపెడదాం. ఈ అంశం మనందరినీ ప్రభావితం చేస్తోంది. ఎందుకంటే దీనివల్ల అర్హులైన ఉద్యోగులకు అధిక పెన్షన్ లభించే అవకాశం ఉంది.

అధిక పెన్షన్ కోసం పోరాటం 2006 నుంచి 2010 మధ్యకాలంలోనే ప్రారంభమైంది. అయితే, ఈ పోరాటంలో ఒక ముఖ్యమైన మైలురాయి 2016లో వచ్చింది.

ఆ సంవత్సరం **ఆర్.సి. గుప్తా కేసులో సుప్రీంకోర్టు తీర్పు** ఇచ్చింది.

ఈ తీర్పులో, EPS నుంచి నిష్క్రమించడానికి లేదా పదవీ విరమణ చేయడానికి ముందు అధిక పెన్షన్ కోసం జాయింట్ ఆప్షన్ ఫారం సమర్పించని కొంతమంది ఉద్యోగులకు కూడా, సంబంధిత నిబంధనల ప్రకారం, ఆప్షన్ సమర్పించే అవకాశం గురించి స్పష్టత వచ్చింది.

EPS చట్టంలో జాయింట్ ఆప్షన్ సమర్పించడానికి ఒక నిర్దిష్ట గడువు విధించలేదనే అంశాన్ని ఈ కేసులో సుప్రీంకోర్టు పరిశీలించింది.

ఇది అధిక పెన్షన్ పోరాటంలో ఒక ముఖ్యమైన మైలురాయి.

## 2. 2022 నవంబర్‌లో సుప్రీంకోర్టు ఇచ్చిన కీలక తీర్పు

అత్యంత ముఖ్యమైన మైలురాయి 2022 నవంబర్‌లో వచ్చింది.

అధిక పెన్షన్‌కు దరఖాస్తు చేయాలనుకునే అర్హులైన ఉద్యోగులు నాలుగు నెలల వ్యవధిలో దరఖాస్తు చేసుకోవచ్చని సుప్రీంకోర్టు పేర్కొంది. దీనికి అనుగుణంగా అవసరమైన ఏర్పాట్లు చేయాలని EPFOకు సూచించింది.

ఈ కేసులో అధిక పెన్షన్‌కు సంబంధించి EPFO పలు అభ్యంతరాలు వ్యక్తం చేసినప్పటికీ, సుప్రీంకోర్టు వాటిని పరిశీలించి తీర్పు ఇచ్చింది. అర్హులైన ఉద్యోగులకు దరఖాస్తు చేసుకునే అవకాశం కల్పించింది.

ఈ తీర్పులో అత్యంత ముఖ్యమైన అంశం ఏమిటంటే, **మినహాయింపు పొందిన ట్రస్టులు (Exempted Establishments) మరియు మినహాయింపు పొందని సంస్థలు (Unexempted Establishments) రెండింటికీ సంబంధించిన ఉద్యోగుల విషయంలో ఈ తీర్పు వర్తించే అంశాన్ని సుప్రీంకోర్టు స్పష్టం చేసింది.**

మినహాయింపు పొందిన ట్రస్టుల ఉద్యోగులకు ఇతర ఉద్యోగులతో పోలిస్తే వేరే ప్రమాణాలు వర్తింపజేస్తే, అది ఉద్యోగుల మధ్య అనుచితమైన వర్గీకరణకు దారితీస్తుందనే అంశాన్ని కోర్టు ప్రస్తావించింది.

EPS చట్టం దేశవ్యాప్తంగా ఈ పథకంలో సభ్యులైన ఉద్యోగులకు వర్తిస్తుంది. అందువల్ల, సంబంధిత అర్హతలు ఉన్న ఉద్యోగులకు తీర్పు ఎలా వర్తిస్తుందనే అంశం కీలకమైంది.

ఈ తీర్పు వెలువడిన తరువాత దేశవ్యాప్తంగా పెన్షనర్లలో ఆశలు పెరిగాయి. అధిక పెన్షన్ పొందవచ్చనే నమ్మకం ఏర్పడింది.

## 3. EPFO దరఖాస్తుల ప్రక్రియ, గడువుల పొడిగింపు

సుప్రీంకోర్టు తీర్పు తరువాత EPFO అవసరమైన ప్రక్రియను ప్రారంభించడానికి కొంత సమయం తీసుకుంది. చివరకు 2023 జూన్ వరకు దరఖాస్తుల కోసం గడువు కల్పించి ఆన్‌లైన్ పోర్టల్‌ను ప్రారంభించింది.

అధిక పెన్షన్ కోసం దరఖాస్తులు ఎలా సమర్పించాలో మేము మా ఛానల్‌లో వివరించాం.

సుమారు **17.5 లక్షల మంది దరఖాస్తులు సమర్పించినట్లు** ఈ ప్రసంగంలో పేర్కొంటున్నారు.

అయితే, ప్రక్రియ ముందుకు సాగుతున్న కొద్దీ గడువులు పలుమార్లు పొడిగించబడ్డాయి. మొదట ఉద్యోగుల దరఖాస్తుల గడువు 2023 డిసెంబర్ వరకు పొడిగించబడింది. ఆ తరువాత యజమానులు దరఖాస్తులను ధృవీకరించడానికి ఇచ్చిన గడువు 2025 జనవరి వరకు కొనసాగింది.

ఈ మధ్యకాలంలో, అంటే 2024 ఫిబ్రవరిలో, EPFO అధిక పెన్షన్ లెక్కింపు విధానానికి సంబంధించి ఒక సర్క్యులర్ జారీ చేసింది.

## 4. 2024 ఫిబ్రవరి సర్క్యులర్: పెన్షన్ లెక్కింపు విధానం

ఈ సర్క్యులర్‌లో పెన్షన్ లెక్కింపు గురించి వివరాలు పేర్కొన్నట్లు వక్త చెబుతున్నారు.

ఆయన వివరణ ప్రకారం:

– **2014 సెప్టెంబర్ 1కి ముందు EPS నుంచి నిష్క్రమించినవారు:** సంబంధిత సుప్రీంకోర్టు తీర్పు ప్రకారం అర్హులైన కొంతమంది ఉద్యోగుల పెన్షన్ లెక్కింపులో చివరి 12 నెలల సగటు జీతాన్ని పరిగణనలోకి తీసుకోవాలని పేర్కొన్నారు. ఇక్కడ బేసిక్ వేతనం, డీఏకు సంబంధించిన అంశాలను పరిగణించాల్సి ఉంటుంది.

– **2014 సెప్టెంబర్ 1 తర్వాత EPS నుంచి నిష్క్రమించినవారు:** చివరి 60 నెలల సగటు జీతాన్ని పరిగణనలోకి తీసుకునే విధానం వర్తిస్తుందని వక్త వివరిస్తున్నారు.

అయితే, 2014 సెప్టెంబర్ 1కి ముందు EPS నుంచి నిష్క్రమించిన ప్రతి ఒక్కరికీ అధిక పెన్షన్ అర్హత ఉంటుందని దీని అర్థం కాదు. సంబంధిత తీర్పు, దరఖాస్తు, అర్హత ప్రమాణాలను బట్టి నిర్ణయం ఉంటుంది.

ఈ సర్క్యులర్ వల్ల అధిక పెన్షన్ ఆశిస్తున్న ఉద్యోగులు సంతోషించారని వక్త పేర్కొంటున్నారు.

కానీ, దరఖాస్తుల పరిశీలన కొనసాగుతున్నప్పుడు ఈ పథకం ఆర్థికంగా సాధ్యమా కాదా అనే అంశంపై EPFOకు ఆందోళనలు ఏర్పడ్డాయని ఆయన అభిప్రాయపడుతున్నారు.

## 5. అధిక పెన్షన్ పథకం ఆర్థికంగా సాధ్యమేనా?

వక్త తన అభిప్రాయాన్ని వివరిస్తూ EPS నిధుల వివరాలను ప్రస్తావిస్తున్నారు.

ఆయన చెప్పిన ప్రకారం, EPS నిధి సుమారు రూ.10 లక్షల కోట్లకు పైగా ఉంది. ఈ నిధులపై సంవత్సరానికి సుమారు రూ.64,000 కోట్ల ఆదాయం వస్తోందని, సాధారణ పెన్షన్ల చెల్లింపులకు సుమారు రూ.28,000 కోట్ల వ్యయం అవుతోందని పేర్కొంటున్నారు.

ఈ గణాంకాల ఆధారంగా అధిక పెన్షన్ పథకం ఆర్థికంగా సాధ్యం కాదనే వాదనతో తాను ఏకీభవించడం లేదని ఆయన చెబుతున్నారు.

అధిక పెన్షన్ మంజూరు చేసినప్పుడు ఉద్యోగులు లేదా పెన్షనర్లు సంబంధిత నిబంధనల ప్రకారం అదనపు మొత్తాలను చెల్లించాల్సి రావచ్చు. ఆ డబ్బును కూడా EPFO పెట్టుబడుల రూపంలో వినియోగించవచ్చని ఆయన వాదిస్తున్నారు.

సుప్రీంకోర్టు 2022లో తీర్పు ఇచ్చే సమయంలో ఈ అంశాలను పరిశీలించిందని కూడా ఆయన అభిప్రాయపడుతున్నారు.

**గమనిక:** ఈ ఆర్థిక గణాంకాలు, ఆదాయం-వ్యయం వివరాలు వక్త చేసిన వాదనలో భాగం. వాటిని అధికారిక EPFO ఆర్థిక నివేదికలతో విడిగా ధృవీకరించాలి.

## 6. 2025 జనవరి 18 సర్క్యులర్‌పై అభ్యంతరాలు

2025 జనవరి 18న EPFO మరో పరిపాలనా సర్క్యులర్ జారీ చేసిందని వక్త చెబుతున్నారు. ఈ సర్క్యులర్ ఉద్యోగుల కోసం కాకుండా అంతర్గతంగా EPFO అధికారులకు జారీ చేసినదని ఆయన వివరిస్తున్నారు.

ఆయన అభిప్రాయం ప్రకారం, ఈ సర్క్యులర్‌లో రెండు ముఖ్యమైన మార్పులు ఉన్నాయి.

### మొదటి అంశం: Exempted Trustల నిబంధనలు

కొన్ని Exempted Trustల నిబంధనలు ఉద్యోగులకు వేతన పరిమితికి మించి అధిక వేతనంపై PF చందాలు చెల్లించడానికి అనుమతించకపోతే, అలాంటి ఉద్యోగులకు వాస్తవ వేతనాల ఆధారంగా అధిక పెన్షన్ ఇవ్వడంపై పరిమితులు విధించినట్లు వక్త ఆరోపిస్తున్నారు.

ఈ విధానం వల్ల దేశవ్యాప్తంగా సుమారు 10.5 లక్షల దరఖాస్తులు తిరస్కరించబడ్డాయని ఆయన పేర్కొంటున్నారు.

ఈ నిర్ణయం సుప్రీంకోర్టు 2022 తీర్పు స్ఫూర్తికి విరుద్ధమని వక్త అభిప్రాయపడుతున్నారు. Exempted, Unexempted ట్రస్టుల ఉద్యోగుల మధ్య తేడా చూపించడం సరైంది కాదని ఆయన వాదిస్తున్నారు.

ఈ నిర్ణయాన్ని సవాలు చేస్తూ దేశంలోని వివిధ హైకోర్టుల్లో పిటిషన్లు దాఖలయ్యాయని చెబుతున్నారు.

కోల్‌కతా, మద్రాస్, పంజాబ్ అండ్ హర్యానా, బాంబే, కర్ణాటక, అలహాబాద్ తదితర హైకోర్టుల్లో ఈ అంశానికి సంబంధించిన కేసులు నమోదైనట్లు ప్రసంగంలో పేర్కొన్నారు.

### రెండో అంశం: Pro-rata విధానం

2025 జనవరి 18 సర్క్యులర్‌లో అధిక పెన్షన్ లెక్కింపునకు Pro-rata విధానాన్ని వర్తింపజేసినట్లు వక్త చెబుతున్నారు.

ఈ విధానం వల్ల 2014 సెప్టెంబర్ 1కి ముందు, ఆ తేదీ తర్వాతి కాలాలకు సంబంధించి పెన్షన్ లెక్కింపును విభజించాల్సి వచ్చిందని ఆయన వివరిస్తున్నారు.

దీని ఫలితంగా కొంతమంది పెన్షనర్ల అధిక పెన్షన్ మొత్తం సుమారు 12% నుంచి 20% వరకు తగ్గిందని ఆయన ఆరోపిస్తున్నారు.

ఉదాహరణకు, ఒకరికి రావాల్సిన పెన్షన్ గణనీయంగా తగ్గితే, వారికి నెలనెలా వచ్చే ఆదాయంపై తీవ్ర ప్రభావం పడుతుందని ఆయన అంటున్నారు.

వక్త అభిప్రాయం ప్రకారం, వేతన పరిమితి ఆధారంగా చందాలు చెల్లించినప్పుడు Pro-rata విధానానికి ఒక తర్కం ఉండవచ్చు. అయితే, వాస్తవ వేతనాల ఆధారంగా చందాలు స్వీకరించిన సందర్భంలో పెన్షన్‌ను కూడా అదే ప్రాతిపదికన లెక్కించాలనేది ఆయన వాదన.

ఈ మార్పు వల్ల ఇప్పటికే అధిక పెన్షన్ పొందుతున్న కొంతమంది పెన్షనర్ల పెన్షన్ కూడా తగ్గిందని ఆయన పేర్కొంటున్నారు.

అందువల్ల, ఒకవైపు పెద్ద సంఖ్యలో దరఖాస్తులు తిరస్కరించబడ్డాయని, మరోవైపు ఇప్పటికే పెన్షన్ పొందుతున్నవారి మొత్తాలు తగ్గాయని వక్త విమర్శిస్తున్నారు.

## 7. వివిధ హైకోర్టుల్లో కేసులు, పెన్షనర్లకు అనుకూలంగా వచ్చిన తీర్పులు

2025 సర్క్యులర్ తరువాత వివిధ హైకోర్టుల్లో పిటిషన్లు దాఖలయ్యాయని వక్త వివరిస్తున్నారు.

మద్రాస్ హైకోర్టు, కేరళ హైకోర్టు, కోల్‌కతా హైకోర్టు తదితర న్యాయస్థానాల్లో కేసులు విచారణకు వచ్చాయని చెబుతున్నారు.

ఈ కేసుల్లో అనేకమంది ఉద్యోగులు, పెన్షనర్లు కలిసి పిటిషన్లు దాఖలు చేశారని, కొన్ని పిటిషన్లు వేలాది మందిని ప్రభావితం చేసే స్థాయిలో ఉన్నాయని ఆయన పేర్కొంటున్నారు.

వక్త అభిప్రాయం ప్రకారం, ఈ అంశంపై వచ్చిన పలు తీర్పులు ఉద్యోగులు, పెన్షనర్లకు అనుకూలంగా ఉన్నాయి.

కొన్ని కేసుల్లో సింగిల్ జడ్జి బెంచ్ తీర్పులు వెలువడిన తరువాత, వాటిని డివిజన్ బెంచ్ ముందు సవాలు చేసినట్లు ఆయన వివరిస్తున్నారు.

మదురై హైకోర్టు డివిజన్ బెంచ్ నుంచి పెన్షనర్లకు అనుకూలమైన తీర్పు వచ్చినట్లు కూడా ప్రసంగంలో పేర్కొన్నారు.

ఈ తీర్పుల తరువాత EPFO ముందు తదుపరి న్యాయపరమైన చర్యలు తీసుకోవాలా, లేక తీర్పులను అమలు చేయాలా అనే ప్రశ్న ఏర్పడిందని వక్త అభిప్రాయపడుతున్నారు.

EPFO సుప్రీంకోర్టును ఆశ్రయించిందని కూడా ఆయన చెబుతున్నారు.

**అయితే, ప్రతి కేసు తీర్పు, దాని పరిధి, అప్పీల్ స్థితి, అమలు ఆదేశాలను సంబంధిత న్యాయస్థానాల అధికారిక ఉత్తర్వుల ఆధారంగా విడిగా పరిశీలించాలి.**

## 8. కేసులపై కేసులు వేయడం వల్ల పెన్షనర్లకు కలుగుతున్న ఇబ్బందులు

వక్త EPFO వ్యవహారశైలిపై తీవ్ర విమర్శలు చేస్తున్నారు.

ఆయన అభిప్రాయం ప్రకారం, ఒక కేసు తరువాత మరొక కేసు, ఒక విచారణ తేదీ తరువాత మరో తేదీ రావడం వల్ల తుది పరిష్కారం ఆలస్యమవుతోంది.

ఈ పరిస్థితిని ఆయన “Litigation till Attrition” అని పేర్కొంటున్నారు. అంటే, న్యాయపరమైన పోరాటం చాలా కాలం కొనసాగడం వల్ల పోరాడుతున్నవారు అలసిపోవడం లేదా కొందరు తుది ఫలితం చూడకముందే మరణించడం వంటి పరిణామాలు ఏర్పడవచ్చని ఆయన భావిస్తున్నారు.

EPS పథకం సామాజిక సంక్షేమ లక్ష్యంతో రూపొందించబడిందని, కాబట్టి పెన్షనర్ల సమస్యలను త్వరగా పరిష్కరించాల్సిన అవసరం ఉందని ఆయన అంటున్నారు.

అధికారులు కొత్త పరిపాలనా నిబంధనలు లేదా సాంకేతిక అభ్యంతరాలు తీసుకొచ్చి ప్రక్రియను మరింత ఆలస్యం చేయకూడదని ఆయన అభిప్రాయపడుతున్నారు.

ఈ నేపథ్యంలో సుప్రీంకోర్టు సమగ్రంగా పరిశీలించి తుది తీర్పు ఇవ్వాలని వక్త విజ్ఞప్తి చేస్తున్నారు.

## 9. పంజాబ్ అండ్ హర్యానా హైకోర్టు, Pro-rata విధానంపై వివాదం

Exempted Trustల అంశంతో పాటు Pro-rata విధానానికి సంబంధించిన న్యాయపోరాటం కూడా కొనసాగుతోందని వక్త వివరిస్తున్నారు.

పంజాబ్ అండ్ హర్యానా హైకోర్టు Pro-rata విధానంపై ముఖ్యమైన తీర్పు ఇచ్చిందని, 2025 జనవరి 18 సర్క్యులర్‌ను రద్దు చేసినట్లు ఆయన చెబుతున్నారు.

మదురై, కర్ణాటక, కోల్‌కతా హైకోర్టుల్లో కూడా ఆ సర్క్యులర్‌కు సంబంధించిన అంశాలపై నిర్ణయాలు వచ్చినట్లు ఆయన పేర్కొంటున్నారు.

ఆయన వాదన ప్రకారం, ఆ సర్క్యులర్ రద్దయితే దానిలోని Pro-rata విధానాన్ని సవాలు చేయడానికి కూడా మార్గం ఏర్పడుతుంది.

అయితే, Pro-rata విధానంపై పంజాబ్ అండ్ హర్యానా హైకోర్టు డివిజన్ బెంచ్‌లో న్యాయపోరాటం కొనసాగుతోందని ప్రసంగంలో పేర్కొన్నారు.

వక్త చెప్పిన వివరాల ప్రకారం, అధిక పెన్షన్ అంశంపై ప్రస్తుతం రెండు ప్రధాన న్యాయపరమైన అంశాలు ఉన్నాయి:

1. Exempted Trustలకు సంబంధించిన అర్హతలు, దరఖాస్తుల తిరస్కరణ అంశం.

2. Pro-rata విధానంతో పెన్షన్ లెక్కింపు, దాని ప్రభావం.

ఈ రెండు అంశాలపై స్పష్టమైన తుది పరిష్కారం అవసరమని ఆయన అభిప్రాయపడుతున్నారు.

## 10. సుప్రీంకోర్టులో అన్ని అంశాలను కలిపి పరిష్కరించాలని విజ్ఞప్తి

సుప్రీంకోర్టును ఆశ్రయించిన పెన్షనర్లు, ఉద్యోగులు తమ కేసుల్లో సంబంధిత అంశాలన్నింటినీ ప్రస్తావించాలని వక్త విజ్ఞప్తి చేస్తున్నారు.

ఆయన ప్రకారం, ముఖ్యంగా ఈ అంశాలను పరిశీలించాలి:

– Exempted Trustలకు సంబంధించిన అర్హతలు.

– Pro-rata విధానం వల్ల పెన్షన్ తగ్గుతున్న అంశం.

– పెన్షన్ బకాయిలపై వడ్డీ చెల్లింపు.

– Close Establishmentలకు సంబంధించిన సమస్యలు.

– Book Adjustment ద్వారా మొత్తాలను సర్దుబాటు చేసే అవకాశం.

– గతంలో దరఖాస్తు చేయలేకపోయిన వారికి మరో అవకాశం కల్పించడం.

### పెన్షన్ బకాయిలపై వడ్డీ

వక్త అభిప్రాయం ప్రకారం, EPFO ఉద్యోగులు లేదా పెన్షనర్లు చెల్లించాల్సిన మొత్తాలపై వడ్డీని పరిగణనలోకి తీసుకుంటున్నప్పుడు, పెన్షన్ బకాయిల చెల్లింపులో కూడా వడ్డీకి సంబంధించిన అంశాన్ని సముచితంగా పరిశీలించాలి.

ఈ అంశంపై కూడా సుప్రీంకోర్టు స్పష్టత ఇవ్వాలని ఆయన కోరుతున్నారు.

### Book Adjustment ద్వారా సర్దుబాటు

చాలామంది పదవీ విరమణ చేసి 10 నుంచి 15 సంవత్సరాలు గడిచిన తరువాత అధిక పెన్షన్ కోసం అవసరమైన అదనపు మొత్తాన్ని ఒకేసారి చెల్లించడం కష్టంగా ఉండవచ్చని వక్త వివరిస్తున్నారు.

ఉదాహరణకు, ఒక పెన్షనర్ రూ.25–26 లక్షలు చెల్లించాల్సి రావచ్చు. అదే సమయంలో, అధిక పెన్షన్ బకాయిల రూపంలో రూ.30–40 లక్షలు రావాల్సి ఉండవచ్చని ఆయన ఉదాహరణ ఇస్తున్నారు.

అలాంటి సందర్భాల్లో, నిబంధనలు అనుమతిస్తే, చెల్లించాల్సిన మొత్తాన్ని రావాల్సిన బకాయిల నుంచి సర్దుబాటు చేసే Book Adjustment విధానం ఉపయోగపడవచ్చని ఆయన అభిప్రాయపడుతున్నారు.

దీంతో పెన్షనర్ ముందుగా పెద్ద మొత్తాన్ని తన జేబు నుంచి చెల్లించాల్సిన అవసరం తగ్గవచ్చని ఆయన చెబుతున్నారు.

పన్నులకు సంబంధించిన అంశాలను కూడా పరిగణనలోకి తీసుకొని ఈ సర్దుబాటును పరిశీలించాలని ఆయన కోరుతున్నారు.

EPFO పన్నుల కారణంగా Book Adjustment సాధ్యం కాదని చెబుతోందని వక్త పేర్కొంటున్నారు. అయితే, బకాయిల చెల్లింపుల సమయంలో TDS మినహాయింపు చేసే విధానం ఇప్పటికే ఉన్నందున, అవసరమైన పన్నును మినహాయించి మిగిలిన మొత్తాన్ని సర్దుబాటు చేసే మార్గాలను పరిశీలించవచ్చని ఆయన అభిప్రాయపడుతున్నారు.

ఇది వక్త చేసిన వాదన మాత్రమే. వాస్తవంగా Book Adjustment సాధ్యమా లేదా అనేది వర్తించే EPFO నిబంధనలు, పన్ను నిబంధనలు, సంబంధిత న్యాయస్థానాల ఆదేశాలపై ఆధారపడి ఉంటుంది.

## 11. అధిక పెన్షన్ కోసం కొత్త దరఖాస్తుల అవకాశాన్ని కల్పించాలి

2023లో కొంతమంది ఉద్యోగులు అధిక పెన్షన్ కోసం దరఖాస్తు చేయలేకపోయారని వక్త చెబుతున్నారు.

దీనికి కారణాలు ఇలా ఉండవచ్చని ఆయన వివరిస్తున్నారు:

– అధిక పెన్షన్ గురించి సరైన సమాచారం లేకపోవడం.

– ఎంత పెన్షన్ వస్తుందో స్పష్టత లేకపోవడం.

– ఎంత మొత్తాన్ని చెల్లించాల్సి ఉంటుందో తెలియకపోవడం.

– దరఖాస్తు ప్రక్రియపై సందేహాలు ఉండటం.

డిమాండ్ లెటర్‌లో ఎంత మొత్తం చెల్లించాలో మాత్రమే కాకుండా, ఆ మొత్తాన్ని చెల్లించిన తరువాత ఎంత పెన్షన్ లభించవచ్చో కూడా స్పష్టంగా తెలియజేయాలని ఆయన కోరుతున్నారు.

పెన్షనర్లు తాము చెల్లించబోయే మొత్తానికి ప్రతిఫలంగా ఎంత ప్రయోజనం పొందుతారో ముందుగానే తెలుసుకునే అవకాశం ఉండాలని ఆయన అభిప్రాయపడుతున్నారు.

అదే విధంగా, 2023లో దరఖాస్తు చేయలేకపోయిన అర్హులైన ఉద్యోగులకు మరోసారి మూడు నుంచి నాలుగు నెలల పాటు దరఖాస్తు చేసుకునే అవకాశం కల్పించాలని ఆయన విజ్ఞప్తి చేస్తున్నారు.

## 12. హైకోర్టుల్లోని కేసులన్నింటినీ సుప్రీంకోర్టు సమగ్రంగా పరిశీలించాలి

అధిక పెన్షన్ అంశంపై వివిధ హైకోర్టుల్లో కొనసాగుతున్న కేసులను సుప్రీంకోర్టు సమగ్రంగా పరిశీలించే అవకాశం గురించి వక్త సూచిస్తున్నారు.

అన్ని సంబంధిత కేసులను ఒకచోటకు తీసుకువచ్చి, అన్ని సమస్యలపై ఒక సమగ్ర తీర్పు ఇవ్వాలని ఆయన కోరుతున్నారు.

ఆయన అభిప్రాయం ప్రకారం, తుది తీర్పు వెలువడిన తరువాత దాని అమలును కూడా నిర్ధారించాలి. పరిపాలనా స్థాయిలో కొత్త సాంకేతిక అభ్యంతరాలు చూపించి తీర్పు అమలును ఆలస్యం చేసే పరిస్థితి రాకూడదు.

గత నాలుగు సంవత్సరాలుగా సాగుతున్న అధిక పెన్షన్ ప్రయాణం మళ్లీ సుప్రీంకోర్టు వద్దకు చేరిందని వక్త చెబుతున్నారు.

2026 సంవత్సరం ముగిసేలోపు సుప్రీంకోర్టు నుంచి తుది తీర్పు రావచ్చని తనకు ఆశ ఉందని ఆయన వ్యక్తిగత అభిప్రాయాన్ని వెల్లడిస్తున్నారు.

అయితే, ఇది ఆయన ఆశాభావం మాత్రమే. తుది తీర్పు ఎప్పుడు వస్తుందో న్యాయస్థానం అధికారికంగా ప్రకటించినప్పుడు మాత్రమే నిర్ధారించగలం.

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