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Calcutta High Court Strikes Down EPFO’s Pro-Rata Formula: A Massive Victory for EPS-95 Pensioners
EPS-95 Higher Pension: How a Single Date Exposed the Flaw in EPFO’s Pro-Rata Calculation
Pro-Rata Rule Quashed: Why the Recent Calcutta High Court Verdict Could Boost Your Pension by 25%
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नमस्कार दोस्तों, वेलकम टू वैल्यूशन। दोस्तों वैलिडेशन में आज हम डिस्कस करेंगे कोलकाता हाई कोर्ट का एक रिसेंट जजमेंट जो प्रोराटा फार्मूला के साथ डायरेक्टली डील करता है। और दोस्तों इस जजमेंट की खासियत यह है कि प्रोराटा फार्मूला को खारिज करने के लिए जो लॉजिक यहां पर यूज़ किया गया है वो बहुत ही सिंपल है। इनफैक्ट जब मैं आपको जजमेंट पढ़कर बताऊंगा तो आपको हंसी आ जाएगी कि भाई कितना आसान तरीके से प्रोराटा को खारिज किया जा सकता था। जबकि हम जब भी प्रोराटा को खारिज करने की बात करते थे हम बहुत कॉम्प्लेक्स कॉम्प्लेक्स लॉजिक लगाया करते थे। जब भी प्रोराटा बेसिस की हम बात करते थे तो जो सबसे पहला आर्गुमेंट आता था वो यही था कि भाई जब सीलिंग बेस्ड पेंशन मिला करती थी तो अलग-अलग टाइम पीरियड में अलग-अलग सैलरी पर लोगों ने कंट्रीब्यूट किया था। जब ईपीएस स्टार्ट हुआ था तो ₹5,000 पे कंट्रीब्यूट किया था। फिर 2001 में ये सीलिंग बढ़ा के ₹6500 की कर दी थी। फिर 2014 आते तक इस सीलिंग को ₹15,000 कर दिया था। मतलब कि कोई व्यक्ति अगर 1995 से ईपीएस का मेंबर है तो कुछ दिनों तक उसने 5000 के ऊपर कंट्रीब्यूट किया होगा। कुछ दिनों तक 6500 पे कंट्रीब्यूट किया होगा और उसके बाद 15,000 पे कंट्रीब्यूट किया होगा। और इसीलिए क्योंकि अलग-अलग टाइम पीरियड में अलग-अलग कंट्रीब्यूशन हुआ है। तो पेंशन में जब इसका वेटेज लिया जाएगा तो वो भी वेटेड एवरेज फार्मूला में लिया जाएगा। जिसको हम कहते हैं प्रोराटा बेसिस फार्मूला और सीलिंग बेस पेंशन के लिए प्रोराटा फार्मूला बिल्कुल सही टेक्निक थी। यह सुप्रीम कोर्ट ने भी माना था। लेकिन दोस्तों जैसे ही हम हायर पेंशन की बात करते हैं तो हायर पेंशन का जब कंट्रीब्यूशन दिया जाता है तो एक्चुअल सैलरी का एक परसेंटेज फिक्स कर दिया गया है और वो परसेंटेज थ्रूउ द वर्किंग साइकिल ऑफ दैट पर्टिकुलर पर्सन वो फार्मूला सेम रहता है क्योंकि यूनिफॉर्म परसेंटेज में आपको एक्चुअल वेजेस के ऊपर कंट्रीब्यूशन देना है हायर पेंशन के लिए इसीलिए हायर पेंशन में प्रो डाटा बेसिस फार्मूला नहीं लगना चाहिए ऐसा एक जनरल आर्गुमेंट हर जगह दिया जाता था। इनफैक्ट जब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का जजमेंट आया तब भी इसी आर्गुममेंट के बेसिस पर केस लड़ा गया और केस जताया गया। लेकिन हम सबकी आंखों के सामने एक ऐसी डेट थी जिस डेट को अगर हम रेफर कर लेते तो हमको इतना कॉम्प्लेक्स आर्गुममेंट देने की जरूरत ही नहीं पड़ती। और यही ब्यूटी है इस कोलकाता हाईकोर्ट के जजमेंट की कि सिर्फ एक डेट के आधार पर प्रोराटा फार्मूला को पूरी तरह से खारिज किया जा सकता है। ये हमको जज साहब ने यहां पर बताया है और उस तरह का रूलिंग भी दिया है। इसीलिए दोस्तों आज का ये वीडियो बहुत ही इंटरेस्टिंग होने वाला है।
16 पेजेस का जजमेंट है। लेकिन मैं पूरा 16 पेजेस का आपको पढ़कर नहीं बताऊंगा। मेनमेन मुद्दे कवर करेंगे और एंड में जो ऑब्जरवेशन है उसके ऊपर थोड़ा फोकस रखेंगे ताकि हम पता कर सके कि ऐसा क्या ऑब्जरवेशन जज साहब ने दिया है जिसके बेसिस पर प्रोराटा फार्मूला को पूरी तरह से खारिज किया जा सकता है। और दोस्तों प्रोराटा को खारिज किया ही जाना चाहिए क्योंकि इससे आपकी जो पेंशनेबल आपकी जो पेंशन बनती है वो एक्चुअली 20 से 25% कम हो जाती है। क्योंकि आपकी जो पेंनेबल सैलरी है वो तकरीबन 30% कम कर दी जाती है। और दोस्तों यह एक बहुत ही बड़ा अन्याय है। क्योंकि जब 2022 का सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट आया था तो सब लोग बड़े खुश थे यह सोच के कि भाई बहुत बढ़िया सी पेंशन बनेगी। लेकिन एक सर्कुलर पहले आया 14 फरवरी 2024 में जहां पर कुछ फार्मूला बताया गया कि भाई किस तरह से दो अलग-अलग ज़ोन में 1 सितंबर 2014 के पहले और 1 सितंबर 2014 के बाद ऐसे दो अलग-अलग कैलकुलेशन करेंगे जिससे आपकी पेंशन कैलकुलेट होगी। फिर एक बहुत बड़ा बम हमारे सर पर डाल दिया था 18 जनवरी 2025 के सर्कुलर से जहां पर और ही ड्रास्टिकली इसको मॉडिफाई कर दिया था कि जो प्रोडाटा बेसिस का फार्मूला है उसको इतना भयंकर कर दिया था कि जिससे आपकी पेंशन 20 से 25 टका कम हो रही थी और दोस्तों ये एक बहुत बड़ा अन्याय ईपीएफओ कर रहा था और इसीलिए सब लोग अब यहां पर कोर्ट में जा रहे थे। तो दोस्तों आज का जो जजमेंट आया है यह हमारी उम्मीद बढ़ाता है क्योंकि प्रोराटा को खारिज करके आपकी पेंशन 20 से 25% से बढ़ा सकता है। इसीलिए दोस्तों आज का वीडियो आखरी तक जरूर देखिएगा। तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं हमारा आज का वीडियो जहां पर हम डिस्कस करेंगे कोलकाता हाई कोर्ट का वो जजमेंट जो प्रोराटा फार्मूला से डील करता है। दोस्तों इससे पहले कि हम आज के वीडियो में आगे बढ़े मेरी आप सब से गुजारिश है कि आपने अगर आज तक वैल्यू एडिशन को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जरूर सब्सक्राइब कीजिएगा। याद रखिएगा वैल्यू एडिशन सीनियर सिटीजंस की मदद का चैनल है। सीनियर सिटीजंस का चैनल है। क्योंकि उनसे रिलेटेड जो भी टॉपिक हो चाहे वो हायर पेंशन से रिलेटेड हो, चाहे वो प्रोटा फार्मूला से रिलेटेड हो, चाहे आपके रिटायरमेंट के बाद की फाइनेंसियल प्लानिंग से रिलेटेड हो, हम ऐसे सारे कंटेंट आपके लिए रेगुलर बेसिस पे लाते हैं। जिससे आपकी जिंदगी में एक छोटा सा वैलिडेशन हो सके। और दोस्तों इसके बदले में हम बस आपसे एक्सपेक्ट करते हैं आपका प्यार, आपका सपोर्ट जो आप हमको दिखा सकते हैं अगर आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब करते हैं। सब्सक्राइब करने से आपको फायदा यह भी होगा कि जब भी हम कोई नया कंटेंट लाएंगे तो आपको ऑटोमेटिक नोटिफिकेशन मिल जाएगा और ऐसा कोई भी इंपॉर्टेंट कंटेंट आप दोस्तों मिस नहीं करेंगे। इसीलिए दोस्तों अगर आपने आज तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जरूर सब्सक्राइब कीजिएगा। अब चलिए दोस्तों हम शुरू करते हैं हमारा आज का वीडियो जहां पर हम देखेंगे कि कोलकाता हाईकोर्ट ने प्रोराटा फार्मूला के लिए क्या जजमेंट दिया। अब दोस्तों जैसे कि आप स्क्रीन पर देख पा रहे हैं ये जो जजमेंट आया है ये आया है हाई कोर्ट एट कोलकाता द कॉन्स्टिट्यूशनल रिड जुरिसडिक्शन का जजमेंट। अब दोस्तों, यह डॉक्यूमेंट हमारे साथ शेयर किया है श्री प्रवीण कोहली जी ने और हम बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं कोहली साहब का क्योंकि हर समय पर नए-नए अपडेट जो भी हायर पेंशन सर आते हैं वो हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं।
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और दोस्तों जिस तरह का सेवा भाव सीनियर सिटीजन कम्युनिटी के लिए प्रवीण कोहली जी ने दिखाया वैसा मैंने किसी और व्यक्ति में नहीं देखा। इसलिए मैं तहे दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं कोहली साहब का। अब [नाक से की जाने वाली आवाज़] दोस्तों, यह जो जजमेंट है, यह दिया था ऑनरेबल जस्टिस शंपा दत्त पॉल जी ने। और दोस्तों, यह जजमेंट जो है रिजर्व कर लिया गया था 19th अगस्त 2026 को लेकिन एक्चुअल डिलीवरी जजमेंट की हुई थी 21 सितंबर 2026 को और यहां पर जो मेन कंटेंट है वो है द रीट एप्लीकेशन हैज़ बीन प्रेफर्ड चैलेंजिंग अ सर्कुलर डेटेड 142 2024 मैंने आपको कहा था कि प्रो डाटा बेसिस फार्मूला के लिए एक्चुअली दो सर्कुलर आए थे। एक आया था 142 2024 का और एक आया था 18 जनवरी 2025 का। पहली बार हायर पेंशन में किस तरह का फार्मूला लगेगा वो बताया गया था 14 फरवरी 2024 के सर्कुलर में और दोस्तों उसी को यहां पर स्ट्रेट स्टेट चैलेंज किया है ऐसा जज साहब का कहना है और मैं आपको पहले ही बता दूं जजमेंट 16 पेजेस का है लेकिन पूरा जजमेंट हम यहां पर नहीं पढ़ेंगे जो काम की चीजें है दोस्तों वो मैं आपके सामने यहां पर लाऊंगा और आपको बताऊंगा है ना अब दोस्तों यहां पर वकीलों ने बहुत अलग-अलग तरह के आर्गुमेंट दिए जो पिटिशनर्स हैं मतलब मतलब कि जो पेंशनर्स हैं उन्होंने कुछ आर्गुमेंट्स दिए। जो ईपीएफओ के वकील थे उन्होंने कुछ आर्गुमेंट्स दिए। अब दोस्तों यहां पर जो पहला आर्गुमेंट दिया गया था वो था प्रीवियसली द एवरेज सैलरी फॉर लास्ट 12 मंथ्स फ्रॉम द एग्जिट डेट ऑफ़ मेंबरशिप फर्स्ट कंसीडर्ड फॉर कैलकुलेटिंग पेंशनेबल सैलरी वि द अमेंडमेंट ऑफ़ 2014 द एवरेज सैलरी फॉर द लास्ट 60 मंथ्स इज टू बी रिकंड एस द पेंशनेबल सैलरी। अब दोस्तों एक अमेंडमेंट आया था ईपीएस एक्ट में साल 2014 में जहां पर पहली बार प्रोराटा फार्मूला इंट्रोड्यूस किया गया था और वहां पर ये बोला गया था कि 1 सितंबर 2014 के पहले तक लास्ट के 12 महीने की जो सैलरी होती थी उसका एवरेज लेके आपकी पेंशनेबल सैलरी कैलकुलेट की जाती थी। लेकिन जैसे ही वो अमेंडमेंट आया उसके बाद से बोला गया कि अब लास्ट 12 महीने का नहीं लास्ट 60 मंथ्स का एवरेज लिया जाएगा और वहां पर आपका पेंशनेबल सैलरी कैलकुलेट किया जाएगा। और दोस्तों ये करने का राशनल क्या था? रशनल ये था दोस्तों कि भाई ईपीएफओ का एक्चुरियल एक वैल्यू्यूएशन हुआ था। जहां पर फंड वैल्यू को इवैलुएट किया गया था और देखा गया था कि भाई कितने दिन तक ये फंड वैल्यू चलेगा। तब उनको पता चला था कि तकरीबन 57,000 करोड़ का कहीं पर डेफिसिट आ रहा है। और यहां पर हमको फार्मूला बदलने की जरूरत है। थोड़ी सी पेंशन वैल्यू कम करने की जरूरत है। जिससे जो फंड ईपीएस के पास है वो परपचुअली चल सकता है। आखरी तक हर आदमी को पेंशन दी जा सकती है। और इसीलिए ये अमेंडमेंट यहां पर लाया था और ये अमेंडमेंट दोस्तों सुप्रीम कोर्ट ने भी मान्य धरा था कि यस लास्ट के 12 महीने का एवरेज मत लीजिए। लास्ट के 60 मंथ का एवरेज लीजिए। और हायर पेंशन के केस में हमको इससे कोई दिक्कत नहीं है। अगर लास्ट के 60 मंथ्स के एवरेज को ले लिया जाए क्योंकि वो एक जग मान्य नियम था। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रूव किया हुआ नियम था।
फॉर एंप्लाइजज़ हु हैव कंट्रीब्यूटेड ऑन एक्चुअल सैलरीज़ लाइक पिटिशनर्स। द पेंशनबल सैलरी इज़ कैलकुलेटेड ऑन बेसिक प्लस जीए। द एवरेज ऑफ द सैलरी इफ ब्रोकन इनू टू स्टेजेस फॉर प्री 19 2014 एंड द पोस्ट 19 2014 द सेम विल रिड्यूस द एवरेज पेंशनबल सैलरी बाय 30 टू 40% दिस इज़ नॉट द इंटेंशन ऑफ़ 2016 अमेंडमेंट ऑफ़ पैरा 114 अंडर ईपीएस 1995। अब दोस्तों यहां पर जो पिटिशनर्स हैं जो पेंशनर्स हैं उनका आर्गुमेंट यह था कि भाई जो सैलरी कैलकुलेट की जाती है पेंशननेबल सैलरी वो कैलकुलेट की जाती है बेसिक प्लस डीए के ऊपर। अब इसको अगर आप दो हिस्सों में अलग-अलग बांट देंगे तो उससे जो पेंशनेबल सैलरी है वो ऑन एन एवरेज 30 से 40 टक्का से कम हो जाती है जिससे पेंशन के ऊपर बहुत गहरा असर पड़ता है और ये इंटेंशन नहीं था जब 2016 में पेंशनेबल सैलरी कैलकुलेट करने का जो फार्मूला है उसको अमेंड किया गया था लीगल तौर पे तो जब ये इंटेंशन नहीं था तो फिर ये अन्याय हमारे साथ क्यों होना चाहिए ऐसा यहां पर पेंशनर्स का कहना था और यह आर्गुममेंट को मानते हुए कोलकाता हाई कोर्ट ने इस एप्लीकेशन को जो रीड एप्लीकेशन आया था इसको एक्सेप्ट कर लिया था ऑन नाइंथ मई 2024 और दोस्तों दो साल से इसकी हियरिंग्स अलग-अलग डेट्स पर चलते आ रही थी और आज इसका फाइनल जजमेंट हमारे सामने आ गया है। अब दोस्तों जब पिटिशनर्स जज साहब को कह रहे हैं कि जब आप स्प्लिट फ़ॉर्मूला लगाते हो, दो अलग-अलग पीरियड का फार्मूला लगाते हो, तो 30 से 40 टक्के का हमारा पेंशनल और सैलरी में डिफरेंस आता है। तो उसका एक एग्जांपल भी यहां पे एक व्यक्ति का इन्होंने दिया हुआ है। इन्होंने बोला है कि जब एक व्यक्ति को पीपीओ इशू किया गया और वहां पर ये प्रोडक्ट बेसिस स्प्लिट फार्मूला लगाया गया तो उनकी पेंशनेबल सैलरी कैलकुलेट की गई ₹47,973 की। जबकि एक्चुअल उनकी सैलरी कैलकुलेट होनी चाहिए थी 76125 फॉर 31 इयर्स ऑफ पेंशनेबल सर्विस। अब क्योंकि प्रोराटा बेसिस फार्मूला लगाया गया था तो 76125 से ये पेंशनबल सैलरी हो गई थी 47973 जो तकरीबन ₹8,000 कम थी एक्सपेक्टेशन से। अब दोस्तों ₹8,000 76,000 का अगर आप एप्रोक्सिममेटली कैलकुलेट करेंगे तो आपको पता चलेगा 40% के आसपास का फिगर आता है। इतना कम हो जाता है पेंशनेबल सैलरी। ये प्रूफ करने के लिए एग्जांपल यहां पर दिया गया था। और मैं भी आपको इसलिए पढ़कर बता रहा हूं ताकि आपको सीरियसनेस का अंदाजा हो कि कितना सीरियस था ये और कितना इंपॉर्टेंट था आपके और मेरे लिए। अब तक के जितने भी आर्गुमेंट हमने देखे वो आर्गुमेंट दिए थे पेंशनर्स के साइड से। अब जो ईपीएफओ और सरकार की तरफ से आर्गुमेंट आया वो है द मेंबर्स ऑफ़ द पेंशन स्कीम पूल देयर कंट्रीब्यूशन इन अ कॉमन फंड फॉर क्रॉस सब्सिडाइजिंग इनएट कंट्रीब्यूशन। क्रॉस सब्सिडाइजेशन कंपनसेट्स द इनएट कंट्रीब्यूशन। सरकार का यह कहना था कि भाई जितना भी पैसा ईपीएस में आता है उसको पुल कर लिया जाता है और जिनकी सैलरी ज्यादा है उनको हायर पेंशन ज्यादा मिलती है। जिनकी सैलरी कम है उनको हायर पेंशन कम मिलती है। और क्योंकि हम पुलिंग करते हैं तो यहां पर क्रॉस सब्सिडाइजेशन होता है कि भाई जिसको ज्यादा मिलना है उसको कुछ और लोग कंट्रीब्यूट करते हैं। जिसको कम मिलना है उसको कुछ और लोग कंट्रीब्यूट करते हैं। और इसी तरह से ऑन एन एवरेज सबको पेंशन दी जाती है और क्रॉस सब्सिडाइज़ेशन ही ईपीएस स्कीम को जिंदा रखता है। यह यहां पर सरकार का और ईपीएफओ के वकील का कहना था। ईपीएफओ के वकील का यह भी कहना था द 2024 अमेंडमेंट अप्लाई इक्वली टू दोज़ हु कंट्रीब्यूट ऑन वेद सीलिंग एंड दोज़ हु कंट्रीब्यूट ऑन देयर एक्चुअल सैलरी व्हिच कैटेगरी इंक्लूड्स द पिटिशनर्स। इन बोथ द केसेस द अमेंडमेंट सॉर्ट टू कैप्चर द प्रोग्रेशन इन सैलरी अक्रॉस वेरियस पे्स ऑफ़ पेंशनेबल सर्विस। ईपीएफओ का कहना यह है कि भाई एक तो क्रॉस सब्सिडाइजेशन होता है और 2014 का जो प्रोराटा फार्मूला इंट्रोड्यूस किया गया था जो अमेंडमेंट किया गया था वो इक्वली उन लोगों को भी एप्लीकेबल है जो सीलिंग पे कंट्रीब्यूट करते हैं और उन लोगों को भी एप्लीकेबल है जो एक्चुअल सैलरी पे कंट्रीब्यूट करते हैं।
और ये ऐसा क्यों किया जाता है? ताकि जिस तरह से आपकी सैलरी बढ़ती है उसको कैप्चर किया जाए। ये जो प्रोग्रेशन होता है उसको कैप्चर किया जाए और क्रॉस सब्सिडाइजेशन इतना ना हो जाए कि भाई कि जो उनकी कम सैलरी है वो बहुत ज्यादा सैलरी वालों को सब्सिडाइज कर रहा है और इसीलिए ये फ्लोरा बेसिस फार्मूला लाया गया था और दोस्तों ये जो क्रॉस सब्सिडाइजेशन की बात है ये सीलिंग बेसिस फार्मूला के लिए एकदम परफेक्टली एप्लीकेबल होती है और मैं बार-बार कह रहा हूं कि सुप्रीम कोर्ट ने इसको मान्य था लेकिन हायर पेंशन के लिए ऐसी कोई भी बात नहीं की गई थी। देखते हैं कि किस तरह से जज साहब ने इसको इवैलुएट किया है। ईपीएफओ आगे कहता है दिस अमेंडमेंट वाज नॉट फोर्स अपॉन द एंप्लाइज कंट्रीब्यूटिंग टू द पेंशन स्कीम ऑन देयर एक्चुअल सैलरीज दे वेयर ऑफर्ड अंडर पैराग्राफ 114 ऑफ द अमेंडेड पेंशन स्कीम द ऑप्शन टू कनफाइन देयर कंट्रीब्यूशन टू द वे सीलिंग एंड हैव देयर कंट्रीब्यूशन अबव द वेट सीलिंग रिमांडेड टू देयर प्रोविडेंट फंड अकाउंट्स। वकीलों का कहना है कि भाई ईपीएफओ ने कभी भी यह जो अमेंडमेंट आया था इसको लोगों के ऊपर थोपा नहीं है कि भाई अगर आपको नहीं चाहिए कि भाई आपको प्रोराटा बेसिस फार्मूला एप्लीकेबल नको है तो आपने क्या करना चाहिए आपने सीधा-सीधा अपना पैसा लेके पीएफ में डाल देना चाहिए आप हायर पेंशन की तरफ आ ही क्यों रहे हो हमने आपको बता दिया कि इस तरह का फार्मूला हम लगाने वाले हैं तो उसके बाद आपको डिसीजन लेना था कि भाई आपको इस फार्मूला के साथ हायर पेंशन लेनी है या आपको सीधा-सीधा अपना पैसा पेंशन ना डाल हुए पीएफ में डाल पीएफ में डाल के उसके ऊपर इंटरेस्ट कमाना है। और दोस्तों यह लॉजिक यहां पर बिल्कुल भी सही नहीं बैठता है। क्योंकि आपने फार्मूला तब नहीं बदला जब मैटर सुप्रीम कोर्ट में था। आपने सुप्रीम कोर्ट से बाहर आने के बाद 2024 में 2025 में फार्मूला बदला है। तो आपने लोगों के ऊपर थोप दिया और 2024 2025 वो समय है दोस्तों जब लोगों ने ऑलरेडी हायर पेंशन के लिए अप्लाई कर दिया था। अगर पहले आप बताते कि भाई हम यह फार्मूला देने वाले हैं तो हो सकता है बहुत सारे लोग अप्लाई नहीं करते लेकिन आपने ऐसा किया कि क्या नहीं किया। आपने एक्चुअल में लोगों से फॉर्म भरवाया और फॉर्म भरवाने के बाद आपने रिट्रोस्पेक्टिवली एक सर्कुलर लाया और जिसको बोला कि अब ये सबके लिए एप्लीकेबल हो जाएगा। तो इसको चॉइस देना नहीं कहते हैं। इसको थोपना कहते हैं। ये ईपीएफओ के वकील यहां पर भूल गए। लेकिन देखते हैं कि आगे क्या कह रहा है। द प द पटिशनर्स डिक्लाइन द ऑफर एंड विलिंगली कंसेंटेड अंडर द पैराग्राफ 114 टू द कंप्यूटेशन ऑफ़ देयर पेंशन बेस्ड ऑन दिस ऑल्टर डेफिनेशन।
हेंस दे आर स्टॉप्ड फ्रॉम डिस्प्यूटिंग द ऑल्टर्ड कंप्यूटेशन ऑफ़ पेंशन। बार-बार यही कहा जा रहा है कि आपको तो चॉइस हमने दिया था। आपने क्यों ली फिर हायर पेंशन? अगर आपको पसंद नहीं है तो। लेकिन मैं एक ही बात बताऊंगा। ये फार्मूला सब अपने हायर पेंशन के फॉर्म हो जाने के बाद बताया है। हायर पेंशन के लिए अप्लाई करने की जो लास्ट डेट थी दोस्तों वह थी 30th जून 2023 जो पहला क्लेरिफिकेशन सर्कुलर आया एपीएफओ से जहां पर ये बताया गया कि पेंशन कैसे कैलकुलेट की जाएगी हायर पेंशन के लिए वो आया 14 फरवरी 2024 मतलब कि डेडलाइन खत्म होने के 6- सात महीने बाद आपने सर्कुलर इशू किया तो आप कैसे बोल रहे हैं कि आपने लोगों को चॉइस दिया था बिल्कुल भी आपने चॉइस नहीं दिया था अब दोस्तों इससे पहले कि हम आगे बढ़े समझते हैं कि करंट टाइम पे ईपीएफओ क्या फ़ूला लगा रहा है। क्योंकि कोर्ट ने भी इस बात को नोट किया है। कैलकुलेशन ऑफ़ पेंशनेबल सैलरी इन हायर वेजेस केसेस दो पैटर्न में किया जाता है। प्री 194 पोस्ट 1924 फॉर पेंनेबल सर्विस प्रायर टू 19 2014 प्रो डाटा पेंशननेबल सैलरी दैट इज़ द हाईएस्ट मंथली सैलरी प्रायर टू 19 2014 और 60 मंथ्स एवरेज ऑफ़ सैलरी प्रिसीविंग द डेट ऑफ़ एग्जिट फ्रॉम द मेंबरशिप ऑफ द पेंशन फंड व्हिच एवर बी लेस। अब दोस्तों यहां पर जो पहला पोर्शन था वहां पर ये कहा जाता है कि आपको दो चीज लेनी है। 1 सितंबर 2014 के पहले आपकी जो भी हाईएस्ट सैलरी थी वो आपको लेनी है। और फिर जब आपने ईपीएससी एग्जिट किया एट द ऑफ़ 58 वहां से 60 मंथ्स का एवरेज लेना है। जो भी कम होगा इन दोनों में से उसको लिया जाएगा और उसके बेसिस पे पहले हाफ की आपकी कंट्रीब्यूशन निकाली जाएगी। फिर जो दूसरा पोर्शन है उसमें क्या किया जाएगा? उसमें किया जाएगा कि भाई 1 सितंबर 2014 के बाद जो भी आपकी हाईएस्ट सैलरी होगी और जो भी आपका लास्ट का 60 मंथ्स का एवरेज होगा उसमें से जो भी कम होगा वो लिया जाएगा। मतलब दोनों पोर्शन में जो कम वाला पोर्शन है वो लिया जाएगा और उसके बेसिस पे आपकी पेंशनेबल सैलरी कैलकुलेट की जाएगी और दो अलग-अलग पीरियड का आपको पेंशन कैलकुलेट करके दिया जाएगा। अब जज साहब यहां पर कहते हैं इट अपीयरर्स दैट पैरा 122 प्रोविजो ऑफ ईपीएस स्कीम हैज़ बीन अपाइड टू क्लेरिफाई एंड अप्लाई द सेम टू पैराग्राफ 114 ऑफ़ द स्कीम इन रिस्पेक्ट ऑफ कंप्यूटेशन ऑफ पेंशन ऑफ मेंबर्स कंट्रीब्यूटिंग ऑन हायर सैलरी। अब दोस्तों दो चीज़ आपको बताता हूं। दो प्रोविज़ो यहां पर बताया पैरा 114 और पैरा 122। पैरा 114 क्या है? पैरा 114 आपको हक देता है हायर पेंशन के लिए अप्लाई करने के लिए कि अगर आप सीलिंग से ऊपर जाके कंट्रीब्यूट करना चाहते हैं तो आप कंट्रीब्यूट कर सकते हैं। वो होता है पैरा 114। दूसरा होता है पैरा 122। पैरा 12 बताता है कि पेंशनेबल सैलरी आपकी कैसे कैलकुलेट की जाएगी? अगर प्रोडक्ट बेसिस फार्मूला लगना है या नहीं लगना है। फिर फार्मूला क्या होगा? यह सब चीजें दोस्तों पैरा 122 में लगाई गई हैं। और जब 2014 में पैरा 122 बनाया गया था तो पैरा 122 में एक्चुअली प्रोराटा फार्मूला लगाया गया था। तो चलिए पढ़ते हैं कि पैरा 122 क्या था और फिर क्या वो 114 के लिए मतलब कि जो हमारा हायर पेंशन का ऑप्शन आता है उसमें एप्लीकेबल होता है कि नहीं होता है वो यहां पर एक बार देखते हैं। पॉइंट नंबर 32 में जज साहब कहते हैं प्रोविज़ो टू पैरा 12 टू ऑफ द स्कीम प्रोवाइड्स पैरा 12 टू इन द केस ऑफ न्यू एंट्रेंट द अमाउंट ऑफ मंथली सुपरशन पेंशन और अर्ली पेंशन एज द केस मे बी शैल बी कंप्यूटेड इन अकॉर्डेंस वि द फॉलोइंग फैक्टर्स नेमली मंथली मेंबर्स पेंशन इक्वल टू पेंशननेबल सर्वरी इंटू पेंशनेबल सर्विस डिवाइड बाय 70 प्रोवाइडेड दैट द मेंबर्स मंथली पेंशन शैल बी डिटरमाइंड ऑन अ प्रोराटा बेसिस फॉर द पेंशननेबल सर्विस अप टू द फर्स्ट डे ऑफ़ सप्टेंबर अह 2014 एट द मैक्सिमम पेंशनबल सैलरी ऑफ़ 6000 एंड ₹500 पर मंथ एंड फॉर द पीरियड देयर आफ्टर एट द मैक्सिमम पेबल सैलरी ऑफ ₹1000 पर मंथ। पैराग्राफ 12 दो आपको कहता है कि आपका फार्मूला क्या होगा वो बताता है और बोलता है कि प्रोराटा फार्मूला लगेगा 1 सितंबर 2014 के पहले और 1 सितंबर 2014 के बाद के लिए और किस वैल्यू पे लगेगा दोस्तों यह बहुत इंपॉर्टेंट है। वो वैल्यू दी है 6500 और 15000। इस बात को नोट कीजिएगा। प्रोडाटा बेसिस एक वैल्यू पे लगना था। वो वैल्यू यहां पर क्लियरली मेंशन की गई है। द प्रोविज़ टू पैरा 122 ऑफ़ द स्कीम हैज़ बीन इंसर्टेड बाय जीएसआर 609 ई डेटेड 2 अगस्त 2014। अब दोस्तों ये जो पैरा डाला गया है पेंशन फार्मूला और प्रो डाटा बेसिस का ये कब डाला गया था? 2 अगस्त 2014 को। द पैरा 114 ऑफ़ द स्कीम वाज़ इंसर्टेड बाय जीएसआर 690 ई डेटेड 2 अगस्त 2014 ओके। अब यह जो पैरा 114 है जहां पर हमको हायर पेशेंट का फॉर्म भरने का ऑप्शन दिया जाता है। यह भी सेम जो गवर्नमेंट सर्कुलर निकला था या गवर्नमेंट नोटिफिकेशन आया था एक्ट के लिए उसमें दिया गया है। यह क्या कहता है? पैरा 114 ऑफ़ द एंप्लाइजज़ पेंशन स्कीम 1995 लेज़ डाउन। द पैरा 114 द एकिस्टिंग मेंबर्स एज ऑन द फर्स्ट डे ऑफ सप्टेंबर 2014 हु एट द ऑप्शन ऑफ द एंप्लयर एंड एंप्लई हैड बीन कंट्रीब्यूटिंग ऑन द सैलरी एक्सीडिंग ₹6500 पर मंथ मे ऑन अ फ्रेश ऑप्शन टू बी जॉइंटली एक्सरसाइज्ड बाय द एंप्लयर एन एंप्लई कंटिन्यू टू कंट्रीब्यूट ऑन सैलरी एक्सीडिंग ₹1000 पर मंथ और फिर दोस्तों ब्रैकेट में दिया है एंड द पेंशन नेबल सैलरी फॉर द एकिस्टिंग मेंबर्स हु प्रेफर सच फ्रेश ऑप्शन शैल बी बेस्ड ऑन हायर सैलरी। अब दोस्तों एक सर्कुलर जिसमें पैराग्राफ 12 दो डाला गया जिसमें क्लियरली पेंशन का फार्मूला दिया है और बोला है कि प्रोडाटा बेसिस फार्मूला लगेगा फॉर सीलिंग बेस्ड पेंशन क्योंकि 6500 और 15000 का फिगर वहां पर बताया था जो सीलिंग बेस्ड था। सेम डेट पर सरकार ने दूसरा पैराग्राफ डाला जो आपको यह अलव करता है 114 के तहत कि आप चाहे तो 15,000 की सीलिंग या 6,500 की सीलिंग को क्रॉस करके अपनी एक्चुअल सैलरी के ऊपर कंट्रीब्यूट कर सकते हैं। और उसी में लिखा गया है द पेंशनेबल सैलरी फॉर द एकिस्टिंग मेंबर्स हु प्रेफर सच फ्रेश ऑप्शन शैल बी बेस्ड ऑन द हायर सैलरी। यहां तक दोस्तों आपको क्लियर है? यहां पर क्लियर बोला है हायर सैलरी पे ही पेंशन देनी है। एंड द पार्ट एंड द पेंशनेबल सैलरी फॉर एकज़िस्टिंग मेंबर्स हु प्रेफर सच फ्रेश ऑप्शन शैल बी बेस्ड ऑन हायर सैलरी हैज़ बीन इंसर्टेड बाय जीएसआर 657 ई डेटेड 1st जुलाई 2016 विद इफ़ेक्ट फ्रॉम 1st जुलाई 2016 एंड एज़ सच एडमिटेडली द सेड पोर्शन हैज़ बीन इंसर्टेड ऑन 17 2016 एंड दस आफ्टर द इंसर्शन ऑफ़ प्रोविज़ो 122 व्हिच वाज़ ऑन 19 2014 ऑन अ कॉन्शियस ियस डिसीजन बीइंग टेकन। दोस्तों, इस केस का सबसे इंपॉर्टेंट पैराग्राफ यही है जो मैं यहां पर येलो में आपको हाईलाइट करके दिखा रहा हूं। जस्ट आपने पता है ऑब्जरवेशन क्या दिया? 1 सितंबर 2014 को फार्मूला आपने डिसाइड कर लिया। 122 में आपने बोल दिया कि सीलिंग बेसिस पेंशन के ऊपर में आपको बुराठा फार्मूला लगेगा। फिर आपने 1 जुलाई 2016 को एक लाइन ऐड की पैराग्राफ 114 में। क्या लाइन ऐड की कि भाई आपकी जो पेंशनेबल सैलरी होगी वो हायर सैलरी पे कंट्रीब्यूट की जाएगी उन लोगों के लिए जो सीलिंग के ऊपर जाके कंट्रीब्यूट कर रहे हैं। और दोस्तों ये आपने कब किया? ये आपने 2014 में नहीं किया। ये आपने जो लाइन ऐड की 2016 में ऐड की। मतलब कि कहीं ना कहीं ईपीएफओ को और सरकार को लगा कि भाई जब हम हायर पेंशन देंगे तो वहां पर प्रोटा फार्मूला नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि अगर प्रोटा फार्मूला लगाना ही था तो फिर ये 2016 में ये स्पेसिफिक लाइन ऐड करने का कोई लॉजिक नहीं बनता था। क्योंकि प्रोडाटा फार्मूला तो ऑलरेडी 122 में दिया हुआ ही था। पैराग्राफ 122 में तो ऑलरेडी प्रोडाटा फार्मूला दिया गया था। क्योंकि ईपीएफओ खुद चाहता था कि देयर शुड बी अ डिस्टिंशन बिटवीन हायर वेजेस पेंशन एंड सीलिंग वेजेस पेंशन।
इसीलिए 2016 में कॉन्शियस डिसीजन लेके ईपीएफओ ने खुद ये क्लॉज़ यहां पर इंसर्ट किया है। और जब ईपीएफओ ने खुद ये क्लॉज़ इंसर्ट किया है तो फिर आज उसको क्यों रिफ्यूट कर रहा है? यही सवाल दोस्तों अब जज साहब के सामने यहां पर आ गया है। और इसीलिए जस्ट सब पॉइंट नंबर 37 में कहते हैं दस द प्रोविज़ोन टू पैरा 122 ऑफ़ द ईपीएफ स्कीम विल नॉट अप्लाई इन द प्रेजेंट केस एंड इट इज़ क्लियर दैट द पेंशनेबल सैलरी फॉर द एकज़िस्टिंग मेंबर्स हु प्रीफर सच फ्रेश ऑप्शन पैरा 114 शैल बी ऑन हायर सैलरी एंड नॉट ऑन प्रोडाटा बेसिस एज़ प्रोवाइडेड बाय प्रोविज़ो टू पैराग्राफ़ 122 ऑफ़ द स्कीम ऐज़ क्लेरिफाइड बाय द इंपोंग लेटर डेटेड फेब 14 2014 क्योंकि 2016 में अलग से कॉन्शियस डिसीजन लेके यह पैराग्राफ ऐड किया है। इसीलिए जो पेंशन दी जाएगी वह हायर सैलरी पे दी जाएगी। प्रो डाटा बेसिस पर नहीं दी जाएगी। ऐसा कोर्ट का कहना है। अकॉर्डिंगली द क्लेरिफिकेशन क्लेरिफिक लेटर डेटेड 142 2024 बीइंग बियड द पावर्स एंड स्कोप ऑफ द अथॉरिटीज़ एंड बेस्ड ऑन ओवरलुकिंग इग्नोरिंग द इंसर्शन डेटेड 17 2016 टू पैराग्राफ 114 इज़ बैड इन लॉ एंड इज़ द स्क्ड एंड सेट असाइड। जज साहब ने प्रोडा बेसिस को साइड कर दिया है यह कह के कि खुद का पहले एक्ट अच्छे से पढ़ लो। कब कब डाला है वह देख लो। और किस बेसिस पर डिसीजन लिया गया था वो देख लो। द पेंशनेबल सैलरी इन रिस्पेक्ट ऑफ़ द मेंबर्स कवर्ड अंडर पैराग्राफ 114 शैल बी गवर्न बाय जीएसआर 675 बी डेटेड फर्स्ट जुलाई 2026 बेस्ड ऑन हायर सैलरी एंड नॉट ऑन प्रोराटा बेसिस ऑल एरियाज़ टू बी पेड अलोंग विद इंटरेस्ट एट द स्टुटरी रेट। जज साहब ने क्लियर कहा है पुराना फार्मूला नहीं लगेगा पूरा एरिया देना पड़ेगा और जो स्टचटरी इंटरेस्ट रेट है उसके ऊपर देना पड़ेगा इंटरिम ऑर्डर इफ एनी स्टैंड्स वेकेटेड और जजमेंट यहां पर क्लियर कर दिया है जज साहब का नाम है चंपा दत्त पॉल जे तो दोस्तों जैसे कि मैंने आपको कहा था कि जब आप ये जजमेंट सुनेंगे तो आपको हंसी आ जाएगी कि कितने आसान कंसीडरेशन पे कितने आसान और कॉमन लॉजिक पे जज साहब ने ईपी पीएफओ के पूरे आर्गुमेंट की धज्जियां उड़ा दी कि भाई सिर्फ एक डेट अपनी डेट देखो आप कि कब आपने वो क्लॉज़ इंसर्ट किया जहां पर आपने खुद लिखा है कि आप हायर सैलरी के ऊपर पेंशन देंगे। आपने वो 2 साल बाद किया है और वो 2 साल बाद जब आपने किया होगा तब कुछ तो आपके दिमाग में आया होगा कि नहीं नहीं नहीं कुछ तो गलत हो रहा है भाई 2014 में हमने प्रोटा फार्मूला लगाया फिर हायर सैलरी वालों को भी प्रराटा लगा रहे हैं तो कोई लॉजिक नहीं बनता इसीलिए सरकार ने और ईपीएफओ ने खुद वो क्लॉज़ इंसर्ट किया था और जब आपने कॉन्शियस डिसीजन ले लिया तो भाई तो एक्ट पढ़ो ना अपने डिसीजंस को पढ़ो ना तो आपको क्लियर आ हो जाएगा कि भाई आपने ऐसा डिसीजन क्यों लिया था और हम धन्यवाद करते हैं जज साहब का यहां पर शंपा दत्त साहब आपका कि भाई इन्होंने इतने आसान भाषा में इतना आसान सा यहां पर कंसीडरेशन हमारे सामने लाके रख दिया कि देखो इतना आसान सा लॉजिक है और आप बड़ी-बड़ी केसेस लड़ रहे हो। कोई जरूरत ही नहीं है। प्रोराटा बेसिस तो हटना ही चाहिए। ज्यादा से ज्यादा पेंशन मिलना आपका हक है। यह क्लियर मैसेज सीनियर सिटीजंस को यहां पर कोलकाता हाईकोर्ट ने इस जजमेंट में दिया है। और इसके लिए हम कोलकाता हाईकोर्ट के बहुत-बहुत शुक्रगुजार हैं। दोस्तों, उम्मीद करता हूं आज का यह वीडियो आपके लिए बहुत ही वैल्यू एडिटिंग रहा होगा। बिल्कुल मजेदार यहां पर जजमेंट आया है और अगर आपको लगता है कि जज साहब का ऑब्जरवेशन बहुत ही सटीक यहां पर रहा है तो डेफिनेटली मुझको कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताइएगा। दोस्तों हो सके तो प्रवीण कोहली जी चंपा दत्त जी के लिए एक धन्यवाद का मैसेज भी अगर आप हमारे कमेंट बॉक्स में दे सके तो बहुत मदद हो जाएगी क्योंकि हम चाहते हैं कि जो लोग सीनियर सिटीजंस की मदद कर रहे हैं जो लोग उनके लिए कानून को सही तरह से इंटरप्रेट कर रहे हैं उनको हम तहे दिल से धन्यवाद करें और सिर्फ हम ही ना करें हमारी जो पूरी कम्युनिटी है हम जो सीनियर सिटीजंस की मदद के लिए जो इतना बड़ा चैनल चला रहे हैं वैल्यूशन का यहां से एक कलेक्टिव लेवल पर हम इन सब लोगों का धन्यवाद करें। ऐसी हमारी कोशिश है और हम उम्मीद करते हैं कि डेफिनेटली आप कमेंट बॉक्स में हमको कमेंट करके बताएंगे कि आपको ये जजमेंट कैसा लगा और अगर आपको पसंद आया तो डेफिनेटली थैंक यू कीजिएगा प्रवीण कोहली जी का, चंपा दत्त जी का जिन्होंने हमारे सामने ये इतनी बढ़िया सी इंफॉर्मेशन यहां पर लाई है। दोस्तों अगर इस इंफॉर्मेशन ने आपकी जिंदगी में वैल्यू ऐड किया तो जरूर शेयर कीजिए अपने दोस्तों के साथ, अपने परिवारजनों के साथ। दोस्तों ऐसी इंफॉर्मेशन आग की तरह फैलनी चाहिए कि देखिए हमारे हक में डिसीजन आ रहे हैं। हमको पेंशन बढ़कर मिलेगी। यह उन सब लोगों के लिए खुशखबरी है जिनकी पेंशन ऑलरेडी स्टार्ट हो चुकी है और उन लोगों के लिए भी जिनकी पेंशन आने वाले समय में शुरू होगी क्योंकि हायर पेंशन का केस अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है और बहुत ही जल्दी इसका फाइनल निर्णय आ जाएगा। इस बात की मुझे 100% गारंटी है और दोस्तों हम सबकी हायर पेंशन शुरू होगी और जब वो पेंशन शुरू होगी तो कम सैलरी पे नहीं होनी चाहिए।
ज्यादा से ज्यादा सैलरी पर होनी चाहिए। और इसीलिए इस तरह के जजमेंट इंपॉर्टेंट होते हैं। तो दोस्तों जब जज साहब हमारे लिए इतना अच्छा इंटरप्रिटेशन कर रहे हैं जब पिटिशनर्स हम सबकी भलाई के लिए ऐसे केसेस लड़ रहे हैं तो हमारी भी एक जिम्मेदारी बनती है कि उनका जो एफर्ट है उनका जो जजमेंट है वो हम ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। इसीलिए दोस्तों, मेरी आप सब से हाथ जोड़कर गुजारिश है कि आप इस जजमेंट को इस वीडियो को ज़्यादा से ज़्यादा WhatsApp ग्रुप में सर्कुलेट करें। कम से कम 10-10 WhatsApp ग्रुप में सर्कुलेट करें ताकि ये इंफॉर्मेशन ज्यादा से ज्यादा सीनियर सिटीजंस तक पहुंच सके और उन सबके चेहरे पर एक बढ़िया सी स्माइल आ जाए कि कोर्ट ने हमारे फेवर में डिसीजन दिया है। और दोस्तों अगर आपने आज तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जरूर सब्सक्राइब कीजिएगा। याद रखिएगा वैल्यू एडिशन सीनियर सिटीजंस की मदद का चैनल है। सीनियर सिटीजंस का चैनल है। और आप लोग अगर अपने ही चैनल को सब्सक्राइब नहीं करेंगे तो फिर कौन करेगा? इसीलिए मुझे पूरी उम्मीद है कि आज ये वीडियो खत्म होने से पहले आप हमारे चैनल को जरूर सब्सक्राइब कीजिएगा। तो चलिए दोस्तों जल्दी मिलेंगे एक नए वीडियो के साथ, एक नए डिस्कशन के साथ। तब तक के लिए सब्सक्राइब करते रहिए हमारा चैनल वैल्यू एडिशन। धन्यवाद। [संगीत] [संगीत]
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నమస్కారం మిత్రులారా, వాల్యుయేషన్కు స్వాగతం. ఈరోజు వాల్యుయేషన్లో, ప్రొరాటా ఫార్ములాను నేరుగా ప్రస్తావించే కోల్కతా హైకోర్టు యొక్క ఇటీవలి తీర్పు గురించి చర్చిద్దాం. ఈ తీర్పు యొక్క ప్రత్యేకత ఏమిటంటే, ప్రొరాటా ఫార్ములాను తిరస్కరించడానికి ఉపయోగించిన తర్కం చాలా సరళంగా ఉండటం. నిజానికి, నేను మీకు ఈ తీర్పును చదివి వినిపించినప్పుడు, ప్రొరాటాను ఎంత సులభంగా తిరస్కరించవచ్చో చూసి మీరు నవ్వుకుంటారు. అయితే, మనం ప్రొరాటాను తిరస్కరించడం గురించి చర్చించినప్పుడల్లా, చాలా సంక్లిష్టమైన తర్కాన్ని ఉపయోగించాము. మనం ప్రొరాటా ప్రాతిపదిక గురించి చర్చించినప్పుడల్లా, మొదటగా వచ్చే వాదన ఏమిటంటే, పెన్షన్లను గరిష్ట పరిమితి ప్రాతిపదికన ఇచ్చినప్పుడు, ప్రజలు వేర్వేరు కాల వ్యవధులలో వేర్వేరు జీతాల వద్ద తమ వాటాను చెల్లించారు. ఈపీఎస్ (EPS) ప్రవేశపెట్టినప్పుడు, ₹5,000 చొప్పున వాటాలు చెల్లించారు. ఆ తర్వాత, 2001లో, ఈ గరిష్ట పరిమితిని ₹6,500కు పెంచారు. ఆపై, 2014 నాటికి, ఈ గరిష్ట పరిమితిని ₹15,000కు పెంచారు. అంటే, ఎవరైనా 1995 నుండి EPS సభ్యునిగా ఉన్నట్లయితే, వారు కొన్ని రోజులు ₹5,000 కంటే ఎక్కువ, కొన్ని రోజులు ₹6,500, ఆపై ₹15,000 చెల్లించి ఉండవచ్చు. ఎందుకంటే, వేర్వేరు కాల వ్యవధులలో వేర్వేరు చెల్లింపులు జరిగాయి. ఈ వెయిటింగ్ను పెన్షన్లకు వర్తింపజేసినప్పుడు, దానిని వెయిటెడ్ యావరేజ్ ఫార్ములా ఉపయోగించి లెక్కిస్తారు, దీనినే మనం ప్రొరాటా బేసిస్ ఫార్ములా అని పిలుస్తాము. సీలింగ్-ఆధారిత పెన్షన్కు ప్రొరాటా ఫార్ములా సరైన పద్ధతి. సుప్రీం కోర్టు కూడా దీనిని గుర్తించింది. కానీ మిత్రులారా, మనం అధిక పెన్షన్ల గురించి మాట్లాడినప్పుడు, అధిక పెన్షన్ల కోసం చెల్లింపులు జరిపినప్పుడు, అసలు జీతంలో ఒక శాతాన్ని నిర్ణయిస్తారు, మరియు ఆ శాతం ఆ వ్యక్తి యొక్క పని జీవితమంతా అలాగే ఉంటుంది. ఈ ఫార్ములా అలాగే ఉంటుంది ఎందుకంటే, అధిక పెన్షన్ల కోసం అసలు వేతనాలకు అదనంగా ఒకే శాతంలో చెల్లించాల్సి ఉంటుంది. అందువల్ల, అధిక పెన్షన్లకు ప్రొ-రాటా బేసిస్ ఫార్ములాను వర్తింపజేయకూడదనే సాధారణ వాదన ప్రతిచోటా వినిపించింది. నిజానికి, పంజాబ్ మరియు హర్యానా హైకోర్టు తీర్పు వెలువడినప్పుడు కూడా, ఇదే వాదన ఆధారంగా కేసు వాదించబడింది. కానీ మనందరి కళ్ల ముందే ఒక తేదీ ఉంది, మరియు మనం దానిని చూసి ఉంటే, ఇంత సంక్లిష్టమైన వాదన చేయవలసి వచ్చేది కాదు. మరియు ఈ కోల్కతా హైకోర్టు తీర్పులోని గొప్పతనం ఇదే: కేవలం ఒకే తేదీ ఆధారంగా ప్రొ-రాటా ఫార్ములాను పూర్తిగా తిరస్కరించవచ్చు. న్యాయమూర్తి ఇక్కడ మాకు ఈ విషయాన్ని వివరించి, అదే విధమైన తీర్పును కూడా జారీ చేశారు. అందుకే మిత్రులారా, ఈరోజు వీడియో చాలా ఆసక్తికరంగా ఉండబోతోంది.
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తీర్పు 16 పేజీల పొడవుంది. కానీ నేను దానిని మొత్తం మీకు చదివి వినిపించను. మనం ప్రధాన సమస్యలను చర్చిద్దాం మరియు చివర్లో ఉన్న పరిశీలనపై కొంచెం దృష్టి పెడదాం, తద్వారా ప్రొరాటా సూత్రాన్ని పూర్తిగా తిరస్కరించడానికి న్యాయమూర్తి ఏ పరిశీలన ఆధారంగా చేశారో మనం తెలుసుకోవచ్చు. మిత్రులారా, ప్రొరాటాను తిరస్కరించాలి, ఎందుకంటే ఇది వాస్తవానికి మీ పెన్షన్ అర్హత మొత్తాన్ని 20 నుండి 25% వరకు తగ్గిస్తుంది. ఎందుకంటే మీకు చెల్లించాల్సిన జీతం సుమారుగా 30% తగ్గిపోతుంది. మిత్రులారా, ఇది ఒక ఘోరమైన అన్యాయం. 2022 సుప్రీంకోర్టు తీర్పు వెలువడినప్పుడు, ప్రతి ఒక్కరూ తమకు చాలా మంచి పెన్షన్ వస్తుందని భావించి చాలా సంతోషించారు. అయితే, ఫిబ్రవరి 14, 2024న ఒక సర్క్యులర్ వెలువడింది, ఇది మీ పెన్షన్ను రెండు వేర్వేరు జోన్లలో లెక్కించడానికి ఒక ఫార్ములాను వివరించింది: సెప్టెంబర్ 1, 2014కు ముందు, మరియు సెప్టెంబర్ 1, 2014 తర్వాత. ఆ తర్వాత, జనవరి 18, 2025 నాటి సర్క్యులర్తో మాపై ఒక పెద్ద బాంబు పడింది, ఇది ప్రొ-రాటా పద్ధతి ఫార్ములాను తీవ్రంగా సవరించి, మీ పెన్షన్ను 20 నుండి 25 శాతం వరకు గణనీయంగా తగ్గించింది. ఇది EPFO చేసిన ఘోరమైన అన్యాయం, అందుకే అందరూ కోర్టుకు వెళ్తున్నారు. మిత్రులారా, నేటి తీర్పు మన ఆశలను పెంచుతోంది, ఎందుకంటే ప్రొ-రాటాను తిరస్కరించడం ద్వారా, మీ పెన్షన్ 20 నుండి 25 శాతం వరకు పెరిగే అవకాశం ఉంది. అందువల్ల, మిత్రులారా, దయచేసి నేటి వీడియోను చివరి వరకు చూడండి. కాబట్టి మిత్రులారా, ప్రొ-రాటా ఫార్ములాకు సంబంధించిన కోల్కతా హైకోర్టు తీర్పు గురించి చర్చించబోయే నేటి వీడియోను ప్రారంభిద్దాం. మిత్రులారా, మనం నేటి వీడియోతో ముందుకు వెళ్లే ముందు, మీరందరూ ఇంకా వాల్యూ ఎడిషన్కు సబ్స్క్రయిబ్ చేసుకోకపోతే, దయచేసి చేసుకోవాలని నేను మిమ్మల్ని కోరుతున్నాను. గుర్తుంచుకోండి, వాల్యూ ఎడిషన్ అనేది వయోవృద్ధులకు సహాయం చేయడానికి అంకితం చేయబడిన ఒక ఛానెల్. ఇది వయోవృద్ధుల కోసం ఉద్దేశించిన ఛానెల్. మీ జీవితానికి కొంత ఆత్మవిశ్వాసాన్ని తీసుకురావడానికి, మేము అధిక పెన్షన్లు, ప్రొరాటా ఫార్ములా, లేదా పదవీ విరమణ తర్వాత ఆర్థిక ప్రణాళిక వంటి అంశాలకు సంబంధించిన కంటెంట్ను మీకు క్రమం తప్పకుండా అందిస్తాము. ఇప్పుడు మిత్రులారా, ప్రొరాటా ఫార్ములాపై కోల్కతా హైకోర్టు ఇచ్చిన తీర్పు ఏమిటో చూద్దాం, మన నేటి వీడియోను ప్రారంభిద్దాం. మిత్రులారా, మీరు స్క్రీన్పై చూస్తున్నట్లుగా, వచ్చిన ఈ తీర్పు రాజ్యాంగబద్ధమైన అధికార పరిధిలోని కోల్కతా హైకోర్టు ఇచ్చినది. మిత్రులారా, ఈ పత్రాన్ని మనతో ప్రవీణ్ కోహ్లీ గారు పంచుకున్నారు. కోహ్లీ గారికి మేమంతా చాలా కృతజ్ఞతలు తెలుపుకుంటున్నాము, ఎందుకంటే హయ్యర్ పెన్షన్ సార్ నుండి ఏ కొత్త సమాచారం వచ్చినా, ఆయన ఎప్పటికప్పుడు వాటిని మాకు అందిస్తూ ఉంటారు.
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మరియు మిత్రులారా, వయోవృద్ధుల సంఘానికి ప్రవీణ్ కోహ్లీ చూపినటువంటి సేవను నేను మరెవరినీ చూడలేదు. అందువల్ల, నేను కోహ్లీకి నా హృదయపూర్వకంగా ధన్యవాదాలు తెలుపుకుంటున్నాను. ఇక ఇప్పుడు [ముక్కుతో మాట్లాడుతున్న స్వరంలో] మిత్రులారా, ఈ తీర్పును గౌరవనీయ న్యాయమూర్తి శంపా దత్ పాల్ గారు వెలువరించారు. మరియు మిత్రులారా, ఈ తీర్పు ఆగస్టు 19, 2026న రిజర్వ్ చేయబడింది, కానీ తీర్పు యొక్క వాస్తవ వెలువరనం సెప్టెంబర్ 21, 2026న జరిగింది. ఇక్కడ ప్రధాన విషయం ఏమిటంటే: 142, 2024 తేదీ గల సర్క్యులర్ను సవాలు చేస్తూ ఈ రిట్ దరఖాస్తు దాఖలు చేయబడింది. ప్రో డేటా బేసిస్ ఫార్ములాకు సంబంధించి వాస్తవానికి రెండు సర్క్యులర్లు ఉన్నాయని నేను మీకు చెప్పాను. ఒకటి 142, 2024 తేదీ గలది, మరియు మరొకటి జనవరి 18, 2025 తేదీ గలది. మొదటిసారిగా, అధిక పింఛను కోసం సూత్రాన్ని ఫిబ్రవరి 14, 2024 తేదీ గల సర్క్యులర్లో వివరించారు, మరియు మిత్రులారా, దానినే ఇక్కడ నేరుగా సవాలు చేశారు, అని న్యాయమూర్తి అంటున్నారు. ఈ తీర్పు 16 పేజీలదని నేను మీకు ముందుగానే తెలియజేస్తున్నాను, కానీ మనం ఇక్కడ మొత్తం తీర్పును చదవము. మిత్రులారా, నేను ఇక్కడ మీ ముందుకు ముఖ్యమైన విషయాలను తీసుకువచ్చి చెబుతాను. ఇప్పుడు మిత్రులారా, ఇక్కడున్న న్యాయవాదులు అనేక రకాల వాదనలు వినిపించారు. పిటిషనర్లు, అంటే పెన్షనర్లు, కొన్ని వాదనలు వినిపించారు. EPFO తరఫున వాదిస్తున్న న్యాయవాదులు కొన్ని వాదనలు వినిపించారు. ఇప్పుడు మిత్రులారా, ఇక్కడ వినిపించిన మొదటి వాదన ఏమిటంటే, గతంలో, పెన్షన్ అర్హత జీతాన్ని లెక్కించడానికి సభ్యత్వం నుండి నిష్క్రమించిన తేదీ నుండి చివరి 12 నెలల సగటు జీతాన్ని మొదట పరిగణనలోకి తీసుకునేవారు. 2014 సవరణతో, చివరి 60 నెలల సగటు జీతాన్ని పెన్షన్ అర్హత జీతంగా పరిగణించాలి. ఇప్పుడు, మిత్రులారా, 2014లో EPS చట్టానికి ఒక సవరణ చేయబడింది, దీని ద్వారా మొదటిసారిగా ప్రొరాటా ఫార్ములాను ప్రవేశపెట్టారు. సెప్టెంబర్ 1, 2014కు ముందు గత 12 నెలల మీ జీతాల సగటును తీసుకోవడం ద్వారా మీ పింఛను అర్హత జీతం లెక్కించబడుతుందని అందులో పేర్కొనబడింది. అయితే, ఆ సవరణ వచ్చిన వెంటనే, ఇకపై కేవలం గత 12 నెలలకు బదులుగా, మీ పింఛను అర్హత జీతాన్ని లెక్కించడానికి గత 60 నెలల సగటును తీసుకుంటారని ప్రకటించారు. మరి మిత్రులారా, దీని వెనుక ఉన్న హేతుబద్ధత ఏమిటి? దీని వెనుక ఉన్న హేతుబద్ధత ఏమిటంటే, EPFO ఒక యాక్చురియల్ వాల్యుయేషన్ నిర్వహించింది, దీనిలో ఫండ్ విలువను అంచనా వేసి, ఆ ఫండ్ విలువ ఎంతకాలం ఉంటుందో నిర్ధారించారు. అప్పుడు వారు సుమారు ₹57,000 కోట్ల లోటు ఉందని కనుగొన్నారు. ఇక్కడే మనం ఫార్ములాను మార్చవలసి వచ్చింది. పింఛను విలువను కొద్దిగా తగ్గించాల్సి వచ్చింది. దీనివల్ల EPS వద్ద ఉన్న నిధులు నిరంతరం కొనసాగగలవు. ప్రతి వ్యక్తికి చివరి వరకు పింఛను ఇవ్వవచ్చు. అందుకే ఈ సవరణను తీసుకువచ్చారు మరియు మిత్రులారా, గత 12 నెలల సగటును తీసుకోకూడదనే ఈ సవరణను సుప్రీం కోర్టు కూడా ఆమోదించింది. గత 60 నెలల సగటును తీసుకోండి. ఇక అధిక పింఛను విషయంలో మాకు ఎలాంటి అభ్యంతరం లేదు. గత 60 నెలల సగటును తీసుకోవడానికి కారణం, అది విశ్వవ్యాప్తంగా ఆమోదించబడిన నియమం కావడమే. అది సుప్రీంకోర్టు ఆమోదించిన నియమం.
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పిటిషనర్ల వలె వాస్తవ జీతాలపై వాటా చెల్లించిన ఉద్యోగులకు, పెన్షన్ అర్హత జీతాన్ని బేసిక్ జీతం మరియు సాధారణ భత్యం (GA) ఆధారంగా లెక్కిస్తారు. జీతాల సగటును 2014కు ముందు (ప్రీ-19, 2014) మరియు 2014కు తర్వాత (పోస్ట్-19, 2014) అని రెండు భాగాలుగా విభజిస్తే, అది సగటు పెన్షన్ అర్హత జీతాన్ని 30 నుండి 40% వరకు తగ్గిస్తుంది. EPS 1995లోని పేరా 114కు 2016లో చేసిన సవరణ ఉద్దేశం ఇది కాదు. ఇప్పుడు మిత్రులారా, ఇక్కడ పెన్షనర్లు అయిన పిటిషనర్ల వాదన ఏమిటంటే, లెక్కించే పెన్షన్ అర్హత జీతాన్ని బేసిక్ జీతం మరియు డిఏ (DA) ఆధారంగా లెక్కిస్తారు. ఇప్పుడు, దీనిని రెండు భాగాలుగా విభజిస్తే, పెన్షన్ అర్హత జీతం సగటున 30 నుండి 40 శాతం తగ్గుతుంది, ఇది పెన్షన్పై తీవ్రమైన ప్రభావాన్ని చూపుతుంది. 2016లో పెన్షన్ అర్హత జీతాన్ని లెక్కించే సూత్రాన్ని చట్టబద్ధంగా సవరించినప్పుడు ఇది ఉద్దేశం కాదు. కాబట్టి, ఇది ఉద్దేశం కానప్పుడు, మాకు ఈ అన్యాయం ఎందుకు జరగాలి? అని ఇక్కడ పెన్షనర్లు అన్నారు. ఈ వాదనను అంగీకరిస్తూ, కోల్కతా హైకోర్టు 2024 మే 9న ఈ దరఖాస్తును స్వీకరించింది. మిత్రులారా, రెండు సంవత్సరాలుగా దీని విచారణలు వేర్వేరు తేదీలలో జరుగుతూ వచ్చాయి, మరియు ఈ రోజు దాని తుది తీర్పు మన ముందుకు వచ్చింది. ఇప్పుడు, మిత్రులారా, పిటిషనర్లు న్యాయమూర్తితో చెబుతున్నదేమిటంటే, మీరు స్ప్లిట్ ఫార్ములాను, అంటే రెండు వేర్వేరు కాలాలకు ఫార్ములాను వర్తింపజేసినప్పుడు, మా పెన్షన్ మరియు జీతం మధ్య 30 నుండి 40 శాతం వ్యత్యాసం ఉంటుంది. కాబట్టి, ఆయన ఇక్కడ దీనికి ఒక వ్యక్తికి సంబంధించిన ఉదాహరణ ఇచ్చారు. ఆయన చెప్పేదేమిటంటే, ఒక వ్యక్తికి PPO జారీ చేసినప్పుడు మరియు ప్రొడక్ట్ బేసిస్ స్ప్లిట్ ఫార్ములాను వర్తింపజేసినప్పుడు, వారి పెన్షన్ అర్హత గల జీతం ₹47,973గా లెక్కించబడింది. అయితే, 31 సంవత్సరాల పెన్షన్ అర్హత గల సర్వీసుకు గాను వారి అసలు జీతం ₹76,125 ఉండాలి. ఇప్పుడు, ప్రొరాటా బేసిస్ ఫార్ములాను వర్తింపజేయడం వల్ల, ఈ పెన్షన్ అర్హత గల జీతం ₹76,125 నుండి ₹47,973కి తగ్గింది, ఇది ఊహించిన దాని కంటే సుమారుగా ₹8,000 తక్కువ. ఇప్పుడు, మిత్రులారా, మీరు సుమారుగా ₹8,000 లెక్క వేస్తే, ఆ సంఖ్య దాదాపు 40%గా వస్తుంది. పెన్షన్కు అర్హత ఉన్న జీతం ఇంతగా తగ్గుతుంది. దీనిని నిరూపించడానికే ఇక్కడ ఉదాహరణ ఇవ్వబడింది. దీని తీవ్రతను, ఇది మీకు మరియు నాకు ఎంత ముఖ్యమైనదో మీరు అర్థం చేసుకోవడం కోసం నేను దీనిని మీకు చదివి వినిపిస్తున్నాను. మనం ఇప్పటివరకు చూసిన వాదనలన్నీ పెన్షనర్ల నుండే వచ్చాయి. ఇప్పుడు, EPFO మరియు ప్రభుత్వం యొక్క వాదన ఏమిటంటే, పెన్షన్ పథకంలోని సభ్యులు తమ వాటాలను ఒక ఉమ్మడి నిధిలో జమ చేసి, సహజ వాటాలకు క్రాస్-సబ్సిడైజేషన్ చేయాలి. క్రాస్-సబ్సిడైజేషన్ అనేది సహజ వాటాలకు పరిహారం అందిస్తుంది. ప్రభుత్వం యొక్క వాదన ఏమిటంటే, EPSలోకి వచ్చే డబ్బంతా ఒకచోట చేర్చబడుతుంది, మరియు ఎక్కువ జీతాలు ఉన్నవారు ఎక్కువ పెన్షన్లు పొందుతారు, అయితే తక్కువ జీతాలు ఉన్నవారు తక్కువ పెన్షన్లు పొందుతారు. మనం డబ్బును ఒకచోట చేర్చడం వల్ల, క్రాస్-సబ్సిడైజేషన్ జరుగుతుంది; ఎక్కువ పొందే వారికి ఎక్కువ లభిస్తుంది, కొందరు వాటా చెల్లిస్తారు, అయితే తక్కువ పొందే వారికి ఎక్కువ లభిస్తుంది. ఈ విధంగా, సగటున ప్రతి ఒక్కరి పింఛను చెల్లించబడుతుంది మరియు క్రాస్-సబ్సిడైజేషన్ వల్లే ఈపీఎస్ పథకం కొనసాగుతోంది. ఇది ఇక్కడి ప్రభుత్వం మరియు ఈపీఎఫ్ఓ న్యాయవాది యొక్క వాదన. 2024 సవరణ, గరిష్ట పరిమితి వరకు వాటా చెల్లించే వారికి మరియు పిటిషనర్లు ఉన్న కేటగిరీలోని వారి అసలు జీతం వరకు వాటా చెల్లించే వారికి సమానంగా వర్తిస్తుందని ఈపీఎఫ్ఓ న్యాయవాది కూడా అన్నారు. రెండు సందర్భాల్లోనూ, పింఛను అర్హత గల సర్వీస్లోని వివిధ వేతనాల వద్ద జీతంలో వచ్చే పెరుగుదలను పరిగణనలోకి తీసుకోవడానికే ఈ సవరణ ఉద్దేశించబడింది. ఈపీఎఫ్ఓ వాదన ఏమిటంటే, మొదటిది క్రాస్ సబ్సిడైజేషన్ మరియు 2014లో ప్రవేశపెట్టిన ప్రొరాటా ఫార్ములాకు చేసిన సవరణ, గరిష్ట పరిమితి వరకు వాటా చెల్లించే వారికి మరియు అసలు జీతం వరకు వాటా చెల్లించే వారికి కూడా సమానంగా వర్తిస్తుంది.
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మరి దీన్ని ఎందుకు చేస్తారు? మీ జీతం పెరిగే విధానాన్ని నమోదు చేయడానికి. ఈ పెరుగుదలను నమోదు చేయడం ద్వారా, తక్కువ జీతాలు ఉన్నవారు ఎక్కువ జీతాలు ఉన్నవారికి సబ్సిడీ ఇచ్చేంతగా క్రాస్-సబ్సిడైజేషన్ విచ్చలవిడిగా జరగకుండా చూస్తారు. అందుకే ప్రొరాటా బేసిస్ ఫార్ములాను ప్రవేశపెట్టారు. మిత్రులారా, ఈ క్రాస్-సబ్సిడైజేషన్ సీలింగ్ బేసిస్ ఫార్ములాకు ఖచ్చితంగా వర్తిస్తుంది. సుప్రీం కోర్టు దీనిని ఆమోదించిందని నేను పదేపదే చెబుతున్నాను, కానీ అధిక పెన్షన్ల విషయంలో అలాంటి పరిశీలన ఏదీ చేయలేదు. న్యాయమూర్తి దీనిని ఎలా మూల్యాంకనం చేశారో చూద్దాం. తమ వాస్తవ జీతాలపై పెన్షన్ పథకానికి చెల్లింపులు చేస్తున్న ఉద్యోగులపై ఈ సవరణను బలవంతంగా రుద్దలేదని EPFO ఇంకా పేర్కొంది. సవరించిన పెన్షన్ పథకంలోని పేరా 114 ప్రకారం, తమ చెల్లింపును వెయిట్ సీలింగ్కు పరిమితం చేసుకునే మరియు వెయిట్ సీలింగ్కు మించిన తమ చెల్లింపును వారి ప్రావిడెంట్ ఫండ్ ఖాతాలకు మళ్లించుకునే ఎంపికను వారికి అందించారు. EPFO ఈ సవరణను ప్రజలపై ఎప్పుడూ రుద్దలేదని న్యాయవాదులు అంటున్నారు. మీకు ఇది ఇష్టం లేకపోతే, లేదా ప్రొరాటా బేసిస్ ఫార్ములా వర్తించకపోతే, మీరేం చేయాలి? మీరు మీ డబ్బును తీసుకుని PFలో జమ చేసుకోవాలి. మీరు అసలు అధిక పింఛను గురించి ఎందుకు ఆలోచిస్తున్నారు? మేము ఈ ఫార్ములాను అమలు చేయబోతున్నామని మీకు చెప్పాము, కాబట్టి ఈ ఫార్ములాతో అధిక పింఛను కావాలా లేక పింఛనుకు బదులుగా మీ డబ్బును నేరుగా పీఎఫ్లో జమ చేసి దానిపై వడ్డీ సంపాదించాలనుకుంటున్నారా అని మీరే నిర్ణయించుకోవాల్సి వచ్చింది. ఈ తర్కం ఇక్కడ అస్సలు చెల్లదు. ఈ విషయం సుప్రీంకోర్టులో ఉన్నప్పుడు మీరు ఫార్ములాను మార్చలేదు. సుప్రీంకోర్టు తీర్పు వెలువడిన తర్వాత 2024 మరియు 2025లో మీరు ఫార్ములాను మార్చారు. అంటే, మీరు దానిని ప్రజలపై రుద్దారు, మరియు 2024, 2025 నాటికి ప్రజలు అప్పటికే అధిక పింఛను కోసం దరఖాస్తు చేసుకున్నారు. మేము ఈ ఫార్ములాను ఇవ్వబోతున్నామని మీరు వారికి ముందే చెప్పి ఉంటే, బహుశా చాలా మంది దరఖాస్తు చేసుకోకపోయి ఉండేవారు, కానీ మీరు ఏం చేయలేదన్నట్టుగా ప్రవర్తించారు. మీరు నిజానికి ప్రజలతో ఫారం నింపించి, ఆ తర్వాత జరిగిన దానికి వర్తించేలా ఒక సర్క్యులర్ తీసుకువచ్చి, ఇప్పుడు ఇది అందరికీ వర్తిస్తుందని చెప్పారు. కాబట్టి దీనిని ఎంపిక ఇవ్వడం అనరు. దీనిని రుద్దడం అంటారు. ఈ ఈపీఎఫ్ఓ న్యాయవాది ఇక్కడ ఒక విషయం మర్చిపోయారు. అయితే అతను తర్వాత ఏమి చెబుతున్నాడో చూద్దాం. పిటిషనర్లు ఆ ప్రతిపాదనను తిరస్కరించి, పేరా 114 ప్రకారం ఈ ప్రత్యామ్నాయ నిర్వచనం ఆధారంగా తమ పింఛను గణనకు స్వచ్ఛందంగా అంగీకరించారు.
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మరి దీన్ని ఎందుకు చేస్తారు? మీ జీతం పెరిగే విధానాన్ని నమోదు చేయడానికి. ఈ పెరుగుదలను నమోదు చేయడం ద్వారా, తక్కువ జీతాలు ఉన్నవారు ఎక్కువ జీతాలు ఉన్నవారికి సబ్సిడీ ఇచ్చేంతగా క్రాస్-సబ్సిడైజేషన్ విచ్చలవిడిగా జరగకుండా చూస్తారు. అందుకే ప్రొరాటా బేసిస్ ఫార్ములాను ప్రవేశపెట్టారు. మిత్రులారా, ఈ క్రాస్-సబ్సిడైజేషన్ సీలింగ్ బేసిస్ ఫార్ములాకు ఖచ్చితంగా వర్తిస్తుంది. సుప్రీం కోర్టు దీనిని ఆమోదించిందని నేను పదేపదే చెబుతున్నాను, కానీ అధిక పెన్షన్ల విషయంలో అలాంటి పరిశీలన ఏదీ చేయలేదు. న్యాయమూర్తి దీనిని ఎలా మూల్యాంకనం చేశారో చూద్దాం. తమ వాస్తవ జీతాలపై పెన్షన్ పథకానికి చెల్లింపులు చేస్తున్న ఉద్యోగులపై ఈ సవరణను బలవంతంగా రుద్దలేదని EPFO ఇంకా పేర్కొంది. సవరించిన పెన్షన్ పథకంలోని పేరా 114 ప్రకారం, తమ చెల్లింపును వెయిట్ సీలింగ్కు పరిమితం చేసుకునే మరియు వెయిట్ సీలింగ్కు మించిన తమ చెల్లింపును వారి ప్రావిడెంట్ ఫండ్ ఖాతాలకు మళ్లించుకునే ఎంపికను వారికి అందించారు. EPFO ఈ సవరణను ప్రజలపై ఎప్పుడూ రుద్దలేదని న్యాయవాదులు అంటున్నారు. మీకు ఇది ఇష్టం లేకపోతే, లేదా ప్రొరాటా బేసిస్ ఫార్ములా వర్తించకపోతే, మీరేం చేయాలి? మీరు మీ డబ్బును తీసుకుని PFలో జమ చేసుకోవాలి. మీరు అసలు అధిక పింఛను గురించి ఎందుకు ఆలోచిస్తున్నారు? మేము ఈ ఫార్ములాను అమలు చేయబోతున్నామని మీకు చెప్పాము, కాబట్టి ఈ ఫార్ములాతో అధిక పింఛను కావాలా లేక పింఛనుకు బదులుగా మీ డబ్బును నేరుగా పీఎఫ్లో జమ చేసి దానిపై వడ్డీ సంపాదించాలనుకుంటున్నారా అని మీరే నిర్ణయించుకోవాల్సి వచ్చింది. ఈ తర్కం ఇక్కడ అస్సలు చెల్లదు. ఈ విషయం సుప్రీంకోర్టులో ఉన్నప్పుడు మీరు ఫార్ములాను మార్చలేదు. సుప్రీంకోర్టు తీర్పు వెలువడిన తర్వాత 2024 మరియు 2025లో మీరు ఫార్ములాను మార్చారు. అంటే, మీరు దానిని ప్రజలపై రుద్దారు, మరియు 2024, 2025 నాటికి ప్రజలు అప్పటికే అధిక పింఛను కోసం దరఖాస్తు చేసుకున్నారు. మేము ఈ ఫార్ములాను ఇవ్వబోతున్నామని మీరు వారికి ముందే చెప్పి ఉంటే, బహుశా చాలా మంది దరఖాస్తు చేసుకోకపోయి ఉండేవారు, కానీ మీరు ఏం చేయలేదన్నట్టుగా ప్రవర్తించారు. మీరు నిజానికి ప్రజలతో ఫారం నింపించి, ఆ తర్వాత జరిగిన దానికి వర్తించేలా ఒక సర్క్యులర్ తీసుకువచ్చి, ఇప్పుడు ఇది అందరికీ వర్తిస్తుందని చెప్పారు. కాబట్టి దీనిని ఎంపిక ఇవ్వడం అనరు. దీనిని రుద్దడం అంటారు. ఈ ఈపీఎఫ్ఓ న్యాయవాది ఇక్కడ ఒక విషయం మర్చిపోయారు. అయితే అతను తర్వాత ఏమి చెబుతున్నాడో చూద్దాం. పిటిషనర్లు ఆ ప్రతిపాదనను తిరస్కరించి, పేరా 114 ప్రకారం ఈ ప్రత్యామ్నాయ నిర్వచనం ఆధారంగా తమ పింఛను గణనకు స్వచ్ఛందంగా అంగీకరించారు.
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అందుకే, 2016లో, EPFO ఒక స్పష్టమైన నిర్ణయం తీసుకుని ఈ నిబంధనను చేర్చింది. మరి ఈ నిబంధనను EPFO స్వయంగా చేర్చినప్పుడు, ఈ రోజు దానిని ఎందుకు తిరస్కరిస్తోంది? మిత్రులారా, ఈ ప్రశ్న ఇప్పుడు న్యాయమూర్తి ముందుకు వచ్చింది. అందుకే, ఉప-అంశం నంబర్ 37లో, ప్రస్తుత కేసులో EPF పథకంలోని పేరా 122 యొక్క నిబంధన వర్తించదని, మరియు 114వ పేరాలో కొత్త ఎంపికను కోరుకునే ప్రస్తుత సభ్యులకు పింఛను అర్హత గల జీతం, పథకంలోని పేరా 122 యొక్క నిబంధన ప్రకారం ప్రొ-రాటా ప్రాతిపదికన కాకుండా, అధిక జీతంపై ఉంటుందని స్పష్టం చేయబడింది, ఇది ఫిబ్రవరి 14, 2014 నాటి ఆదేశ లేఖ ద్వారా స్పష్టం చేయబడింది. ఎందుకంటే ఈ పేరాను 2016లో ఒక ప్రత్యేక స్పష్టమైన నిర్ణయం తీసుకుని చేర్చారు. అందువల్ల, ఇవ్వబడే పింఛను ప్రొ-రాటా ప్రాతిపదికన కాకుండా అధిక జీతంపై ఇవ్వబడుతుంది. ఇది కోర్టు చెబుతున్న విషయం. తేదీ 142 జూలై 2024 నాటి స్పష్టీకరణ లేఖ ప్రకారం, అధికారుల అధికార పరిధికి మరియు అధికారాలకు అతీతంగా ఉండటం మరియు పేరా 114కు తేదీ 17 జూలై 2016న చేసిన చేర్పును విస్మరించి, పట్టించుకోకుండా ఉండటం చట్టవిరుద్ధం మరియు దానిని పరిగణించి రద్దు చేయడం జరిగింది. న్యాయమూర్తి ప్రొ-రాటా పద్ధతిని రద్దు చేస్తూ, ముందుగా చట్టాన్ని జాగ్రత్తగా చదవండి. దానిని ఎప్పుడు చేర్చారో మరియు ఏ ప్రాతిపదికన నిర్ణయం తీసుకున్నారో చూడండి అని పేర్కొన్నారు. పేరా 114 పరిధిలోకి వచ్చే సభ్యులకు సంబంధించిన పింఛను అర్హత గల జీతం, అన్ని ప్రాంతాలలో ప్రొ-రాటా ప్రాతిపదికన కాకుండా అధిక జీతం ఆధారంగా తేదీ 1 జూలై 2026 నాటి GSR 675B ద్వారా నియంత్రించబడుతుంది మరియు చట్టబద్ధమైన రేటు ప్రకారం వడ్డీతో పాటు చెల్లించబడుతుంది. పాత ఫార్ములా వర్తించదని, మొత్తం ప్రాంతాన్ని చట్టబద్ధమైన వడ్డీ రేటు ప్రకారమే ఇవ్వాల్సి ఉంటుందని జడ్జి సాహెబ్ స్పష్టంగా చెప్పారు. మధ్యంతర ఉత్తర్వులలో ఏదైనా ఖాళీగా ఉంటే, ఆ తీర్పు ఇక్కడ స్పష్టం చేయబడింది. ఆ జడ్జి సాహెబ్ పేరు చంపా దత్ పాల్ జె. కాబట్టి మిత్రులారా, నేను మీకు చెప్పినట్లుగా, మీరు ఈ తీర్పును విన్నప్పుడు నవ్వుకుంటారు. ఇంతటి సాధారణమైన విషయంపై, ఇంతటి సులభమైన మరియు సాధారణ తర్కంపై, జడ్జి సాహెబ్ EP PFO యొక్క మొత్తం వాదనను ఎలా చీల్చి చెండాడారో చూడండి. సోదరా, ఒక్క తేదీని చూడండి, అది మీ తేదీ. ఎక్కువ జీతంపై పెన్షన్ ఇస్తామని మీరే రాసిన ఆ నిబంధనను ఎప్పుడు చేర్చారు? మీరు రెండు సంవత్సరాల తర్వాత ఆ పని చేశారు, అలా రెండు సంవత్సరాల తర్వాత మీరు ఆ పని చేసినప్పుడు, మీకు ఈ విషయం తట్టి ఉండాలి: “లేదు, లేదు, ఏదో తప్పు జరుగుతోంది. 2014లో మనం ప్రొరాటా ఫార్ములాను అమలు చేశాం, ఇప్పుడు ఎక్కువ జీతాలు తీసుకుంటున్న వారికి కూడా ప్రొరాటాను వర్తింపజేస్తున్నాం. దీనికి అర్థం లేదు. అందుకే ప్రభుత్వం మరియు EPFO స్వయంగా ఆ నిబంధనను చేర్చాయి. మీరు ఒక స్పృహతో కూడిన నిర్ణయం తీసుకున్నప్పుడు, చట్టాన్ని చదవండి, మీ నిర్ణయాలను చదవండి, అప్పుడు మీరు ఆ నిర్ణయం ఎందుకు తీసుకున్నారో మీకు స్పష్టంగా తెలుస్తుంది. ఇంతటి సరళమైన విషయాన్ని ఇంత సరళమైన భాషలో వివరించినందుకు జడ్జి శంపా దత్కు మేము ధన్యవాదాలు తెలుపుతున్నాము. “చూడండి, ఇది చాలా సరళమైన తర్కం, అయినా మీరు ఇంత పెద్ద కేసులతో పోరాడుతున్నారు. దాని అవసరం లేదు. ప్రొరాటా పద్ధతిని రద్దు చేయాలి.” “గరిష్ట పింఛను పొందడం మీ హక్కు.” కోల్కతా హైకోర్టు ఈ తీర్పులో వయోవృద్ధులకు ఈ స్పష్టమైన సందేశాన్ని అందించింది. అందుకు మేము కోల్కతా హైకోర్టుకు ఎంతో కృతజ్ఞులమై ఉన్నాము. మిత్రులారా, ఈరోజు వీడియో మీకు ఎంతో ఉపయోగపడిందని ఆశిస్తున్నాను. ఇందులోని తీర్పు చాలా ఆసక్తికరంగా ఉంది, మరియు న్యాయమూర్తి గారి పరిశీలన చాలా కచ్చితమైనదని మీకు అనిపిస్తే, కామెంట్ సెక్షన్లో మీ అభిప్రాయాన్ని తప్పకుండా తెలియజేయండి. మిత్రులారా, వీలైతే, మా కామెంట్ సెక్షన్లో ప్రవీణ్ కోహ్లీ మరియు చంపా దత్లకు కూడా కృతజ్ఞతా సందేశాన్ని తెలియజేస్తే మాకు చాలా సహాయకరంగా ఉంటుంది. వయోవృద్ధులకు సహాయం చేస్తూ, వారి కోసం చట్టాన్ని సరిగ్గా వివరిస్తున్న వారికి మేము మనస్ఫూర్తిగా ధన్యవాదాలు తెలియజేయాలనుకుంటున్నాము. కేవలం మేము మాత్రమే కాదు, వయోవృద్ధుల ప్రయోజనం కోసం ఇంత పెద్ద ఛానెల్ను నడుపుతున్న మా మొత్తం సమాజానికి, మేమంతా సామూహికంగా ధన్యవాదాలు తెలియజేయాలి. ఇది మా ప్రయత్నం మరియు ఈ తీర్పు మీకు ఎలా నచ్చిందో కామెంట్ బాక్స్లో మాకు తప్పకుండా తెలియజేస్తారని మేము ఆశిస్తున్నాము. ఒకవేళ మీకు నచ్చితే, ఈ అద్భుతమైన సమాచారాన్ని మా ముందుకు తీసుకువచ్చినందుకు ప్రవీణ్ కోహ్లీ జీ మరియు చంపా దత్ జీలకు తప్పకుండా ధన్యవాదాలు తెలియజేయండి. మిత్రులారా, ఒకవేళ ఈ సమాచారం మీ జీవితానికి విలువను చేకూర్చినట్లయితే, దానిని మీ స్నేహితులతో మరియు కుటుంబ సభ్యులతో తప్పకుండా పంచుకోండి. మిత్రులారా, ఇలాంటి సమాచారం దావానలంలా వ్యాపించాలి. చూడండి, నిర్ణయాలు మనకు అనుకూలంగా వస్తున్నాయి. మనకు పెరిగిన పెన్షన్ లభిస్తుంది. ఇది ఇప్పటికే పెన్షన్ ప్రారంభమైన వారందరికీ, అలాగే భవిష్యత్తులో పెన్షన్ ప్రారంభమయ్యే వారికి కూడా శుభవార్త. ఎందుకంటే అధిక పెన్షన్ కేసు ఇప్పుడు సుప్రీంకోర్టుకు చేరింది మరియు దాని తుది తీర్పు అతి త్వరలో రానుంది. నేను దీనికి 100% హామీ ఇస్తున్నాను. మిత్రులారా, మనందరికీ అధిక పెన్షన్ ప్రారంభమవుతుంది మరియు ఆ పెన్షన్ ప్రారంభమైనప్పుడు, అది తక్కువ జీతం మీద ఉండకూడదు.
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వారికి గరిష్ట వేతనం చెల్లించాలి. అందుకే ఇలాంటి తీర్పులు చాలా ముఖ్యమైనవి. కాబట్టి మిత్రులారా, న్యాయమూర్తి మనకు ఇంత మంచి వ్యాఖ్యానం ఇస్తున్నప్పుడు, పిటిషనర్లు మనందరి సంక్షేమం కోసం ఇలాంటి కేసులతో పోరాడుతున్నప్పుడు, వారి కృషిని, వారి తీర్పును వీలైనంత ఎక్కువ మందికి చేరవేయడం మన బాధ్యత అవుతుంది.